दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल ( फाइल फोटो ) 
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इस एशियाई देश के पूर्व राष्ट्रपति को ‘मार्शल लॉ’ लागू करने के लिए मिली कड़ी सजा

न्यायाधीश जी कुई-यून ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को दिसंबर 2024 में ‘मार्शल लॉ’ लागू करने का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। न्यायाधीश जी कुई-यून ने यून को ‘नेशनल असेंबली’ (संसद) पर अवैध रूप से कब्जा करने के प्रयास के तहत सेना और पुलिस बल को जुटाने, नेताओं को गिरफ्तार करने और ‘‘कुछ समय’’ तक निरंकुश शासन स्थापित करने का दोषी करार दिया।

Narendra Kumar Singh

सियोलः दक्षिण कोरिया की अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को दिसंबर 2024 में ‘मार्शल लॉ’ लागू करने का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। न्यायाधीश जी कुई-यून ने कहा कि उन्होंने यून को ‘नेशनल असेंबली’ (संसद) पर अवैध रूप से कब्जा करने के प्रयास के तहत सेना और पुलिस बल को जुटाने, नेताओं को गिरफ्तार करने और ‘‘कुछ समय’’ तक निरंकुश शासन स्थापित करने का दोषी करार दिया। नेशनल असेंबली में विपक्षी उदारवादी सांसदों का बहुमत है। यून के इस फैसले के खिलाफ अपील करने की संभावना है।

एक विशेष अभियोजक ने यून के लिए मौत की सजा की मांग करते हुए कहा कि उनके कार्यों ने देश के लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा किया और वह सबसे गंभीर सजा के हकदार हैं। हालांकि अधिकतर विश्लेषकों को उन्हें उम्रकैद की सजा मिलने की उम्मीद थी क्योंकि इस पूरे घटनाक्रम में कोई हताहत नहीं हुआ था। दक्षिण कोरिया ने 1997 के बाद से मृत्युदंड की सजा पाए किसी भी कैदी को फांसी नहीं दी है।

जैसे ही यून अदालत पहुंचे, सैकड़ों पुलिस अधिकारी उन पर कड़ी नजर रखे हुए थे जबकि उनके समर्थक न्यायिक परिसर के बाहर इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। यून को ले जा रही जेल बस के गुजरते ही उनके समर्थन में नारे और भी तेज हो गए। इस बीच, यून के आलोचक भी पास ही जमा हो गए और उनके लिए मौत की सजा की मांग करने लगे।

सजायाफ्ता यून ने क्या कहा

अदालत ने यून के ‘मार्शल लॉ’ के फरमान को लागू करने में शामिल कई पूर्व सैन्य एवं पुलिस अधिकारियों को भी दोषी ठहराया और सजा सुनाई, जिनमें पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग ह्यून भी शामिल हैं जिन्हें इसकी योजना बनाने और सेना को जुटाने में उनकी केंद्रीय भूमिका के लिए 30 साल की जेल की सजा मिली। अपने बचाव में यून ने कहा कि यह उदारवादी विचारधारा वाले सांसदों को रोकने के लिए आवश्यक था। यून ने उन्हें ‘‘राष्ट्र विरोधी’’ ताकत करार देते हुए कहा कि विपक्षी दलों के ये सांसद उनके एजेंडा को आगे बढ़ाने में बाधक थे।

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