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ड्रग्स तस्करी का बदला चेहरा, तस्कर अपना रहे नया पैंतरा

MDMA और हाइड्रोपोनिक गांजा : नयी पीढ़ी के लिए नया खतरा

हाई‑पोटेंसी ड्रग्स ने बदला नशे का ट्रेंड

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : ड्रग्स तस्करी के मामलों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जांच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, पहले जहां पारंपरिक नशीले पदार्थों की तस्करी बड़े पैमाने पर होती थी, वहीं अब सिंथेटिक और केमिकल आधारित ड्रग्स के मामले तेजी से बढ़े हैं। न सिर्फ ड्रग्स के प्रकार बदले हैं, बल्कि उनका रूप, पैकेजिंग और सप्लाई का पूरा तरीका भी बदल चुका है।

पहले इन ड्रग्स की ज्यादा होती थी तस्करी

करीब 5 से 10 साल पहले तक ड्रग्स तस्करी के मामलों में गांजा, हेरोइन और ब्राउन शुगर प्रमुख रूप से जब्त किये जाते थे। गांजा आमतौर पर बोरे, बंडल या बड़े पैकेट में मिलता था, जबकि हेरोइन और अफीम पाउडर या ठोस रूप में बरामद होती थीं। इन ड्रग्स की तस्करी अक्सर बड़ी खेप में की जाती थी, जिससे एक ही कार्रवाई में भारी मात्रा पकड़ में आ जाती थी।

हाई-पोटेंसी ड्रग्स से बदला नशे का ट्रेंड

सूत्रों के अनुसार अब बाजार में सिंथेटिक और लैब में तैयार ड्रग्स तेजी से फैल रही है। इनमें एमडीएमए (MDMA), अफीम (OPM), सिंथेटिक टैबलेट्स, कैप्सूल, क्रिस्टल, पाउडर और लिक्विड ड्रग्स (सिरप जैसे) शामिल हैं। इनके अलावा हाइड्रोपोनिक गांजा, जो सामान्य गांजे से ज्यादा शक्तिशाली माना जाता है वह भी बड़ी मात्रा में पकड़ा जा रहा है। बताया जा रहा है कि इसका बड़ा हिस्सा थाईलैंड सहित विदेशों से तस्करी कर लाया जा रहा है।

कोकीन की तस्करी में भी इजाफा

जांच एजेंसियों के अनुसार हाल के समय में कोकीन की तस्करी और गिरफ्तारी के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी गयी है हालांकि इसकी मात्रा अन्य ड्रग्स की तुलना में कम होती है, लेकिन इसकी कीमत और नशे का असर काफी ज्यादा होता है। छोटे पैकेट में सप्लाई होने के कारण इसे पकड़ना एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है। इसके अलावा जहां पहले गांजा जैसे ड्रग्स की तस्करी बड़े पैमाने पर होती थी, अब कई सिंथेटिक ड्रग्स बेहद कम मात्रा में भी ज्यादा असरदार और महंगी होती हैं। इसी वजह से तस्कर अब छोटी-छोटी क्वांटिटी में सप्लाई कर रहे हैं, जिससे नेटवर्क को छिपाकर चलाना आसान हो जाता है।

तस्करी के तरीकों में भी बड़ा बदलाव

पहले जहां बड़े कंसाइनमेंट पकड़े जाते थे, अब ड्रग्स छोटे पैकेट, टैबलेट स्ट्रिप, बोतल, सीलबंद कंटेनर या सामान्य सामान की पैकेजिंग में मिल रही हैं। इन्हें आम दवाइयों या रोजमर्रा के सामान जैसा दिखाने की कोशिश की जाती है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए पहचान करना और कठिन हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रग्स और उसकी तस्करी के बदलते स्वरूप को देखते हुए सख्त निगरानी, शुरुआती पहचान और जनजागरूकता बेहद जरूरी है। खासकर युवाओं को एमडीएमए, सिंथेटिक टैबलेट्स और हाइड्रोपोनिक गांजा जैसे नये नशों से दूर रखने के लिए सूचना और शिक्षा सबसे बड़ा हथियार माने जा रहे हैं।

बंगाल में ड्रग्स तस्करी के नये जटिल रूट

बंगाल में ड्रग्स तस्करी के नये रूट और तरीके सामने आ रहे हैं। पहले अधिकांश खेप बांग्लादेश या सीमावर्ती मार्गों से सीधे कोलकाता एयरपोर्ट के जरिए राज्य में पहुंचती थी, लेकिन अब तस्करों ने रास्ते को जटिल और घुमावदार बना दिया है। थाईलैंड जैसे देशों से बड़ी मात्रा में ड्रग्स पहले नेपाल पहुंचाई जाती हैं, वहां से बिहार होते हुए अलग‑अलग छोटे रास्तों के जरिए बंगाल में एंट्री कराई जाती है। कम निगरानी वाले छोटे एयरपोर्ट और मल्टी-स्टेप ट्रांजिट अब तस्करों की नई रणनीति बनते जा रहे हैं।

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