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SIR सुनवाई का नोटिस पाकर कोमा में चली गयी बुजुर्ग महिला की हुई मौत

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

घोला : पानीहाटी अंचल के घोला थाना अंतर्गत बिलकांदा 1 नंबर पंचायत क्षेत्र से एक अत्यंत दुखद घटना सामने आई है। चुनाव आयोग के एसआईआर (SIR) सुनवाई के नोटिस का तनाव एक 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला के लिए जानलेवा साबित हुआ। नोटिस मिलने के बाद दिल का दौरा पड़ने से कोमा में चली गई अलका विश्वास ने 6 दिनों तक मौत से लड़ने के बाद आज दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक और प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

क्या था पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, तालबांदा उत्तरपाड़ा की रहने वाली बुजुर्ग अलका विश्वास को हाल ही में चुनाव आयोग की ओर से एसआईआर (Special Investigation Report) सुनवाई में उपस्थित होने का नोटिस मिला था। परिवार के सदस्यों का कहना है कि 80 साल की उम्र में इस कानूनी प्रक्रिया और पूछताछ के डर ने उनके मन में गहरी दहशत पैदा कर दी थी। नोटिस देखते ही वह घबरा गईं और घर के भीतर ही उन्हें जोरदार हृदयघात (हार्ट अटैक) आया।

अस्पताल में 6 दिनों का संघर्ष

पिछले रविवार को जब अलका विश्वास की स्थिति गंभीर हो गई, तो उन्हें आनन-फानन में कोलकाता मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, दिल के दौरे के कारण उनके मस्तिष्क पर गहरा असर पड़ा था और वह कोमा में चली गई थीं। 4 जनवरी से वह अस्पताल के आईसीयू में वेंटिलेटर और जीवन रक्षक प्रणाली पर थीं। आज शनिवार सुबह, छह दिनों के लंबे संघर्ष के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली।

विधायक और मंत्री ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

इस घटना की खबर मिलते ही इलाके के विधायक निर्मल घोष और राज्य सरकार के मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने इस मामले में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। मंत्री का कहना है कि: "80 साल की बुजुर्ग महिला को इस तरह के नोटिस भेजकर मानसिक दबाव बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।" चुनाव आयोग की भूमिका की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए था। क्या एक बुजुर्ग महिला इतनी बड़ी अपराधी थी कि उन्हें सुनवाई के नाम पर इस कदर डरा दिया गया?

इलाके में व्याप्त है तनाव और शोक

वृद्धा की मृत्यु की खबर जैसे ही तालबांदा उत्तरपाड़ा पहुंची, वहां सन्नाटा पसर गया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं के नाम पर आम जनता, विशेषकर बुजुर्गों को बेवजह परेशान किया जा रहा है। अलका विश्वास एक शांत स्वभाव की महिला थीं और उनकी इस तरह अचानक मौत ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है।

फिलहाल, परिवार के सदस्य और स्थानीय लोग वृद्धा के पार्थिव शरीर का इंतजार कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक नोटिस और आम आदमी के मानसिक स्वास्थ्य के बीच के संतुलन पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

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