वेतन के मद में मिली अतिरिक्त राशि वसूलने का आदेश
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : स्वास्थ्य विभाग ने इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री (IOP) की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रियाल दास के पद के दर्जा को घटाते हुए मेडिकल ऑफिसर कर दिया है। अभी तक वे असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्य कर रहीं थी। स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को यह आदेश जारी किया है। इसके साथ ही कहा है कि असिस्टेंट प्रोफेसर के मद पर कार्य करने के कारण जो अतिरिक्त वेतन मिला है उसकी वसूली की जाएगी। अलबत्ता डॉ. दास ने स्वास्थ्य विभाग के आदेश को चुनौती दी है। विभाग का दावा है कि नियम के मुताबिक वे मेडिकल अफसर के पद की हकदार हैं।
6 साल पुरानी नियुक्ति पर फिर छिड़ा विवाद
करीब छह साल पहले असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर की गई उनकी नियुक्ति को लेकर काफी विवाद हुआ था। डॉ. रियाल दास, वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एस. पी. दास की बेटी हैं। आरजीकर मामले के दौरान डॉ. एस. पी. दास का नाम काफी उछला था। मेडिकल सर्किल में उन्हें 'नॉर्थ बंगाल लॉबी' का मास्टरमाइंड बताया जाता है। सूत्रों का दावा है कि इस लॉबी का सरकारी डॉक्टरों की नियुक्ति, ट्रांसफर और पोस्टिंग में भारी दबदबा था। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि यह विशेष नियुक्ति नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियमों को दरकिनार करते हुए की गई थी। आरोप है कि इस पद का सृजन उनके लिए किया गया था।
रियाल दास के पास बिहार के एक निजी मेडिकल कॉलेज से MBBS की डिग्री है और वह दिसंबर 2020 से IOP के साइकियाट्रिक एपिडेमियोलॉजी विभाग में एकमात्र फैकल्टी के रूप में कार्यरत हैं। डॉ. रियाल दास ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि उनके पास अमेरिकी विश्वविद्यालय से एमएस ( MS) की डिग्री और फेलोशिप है। उनकी नियुक्ति पूरी तरह योग्यता के आधार पर की गई थी।