भुवनेश्वर : बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष और ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की। उन्होंने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की पूरी प्रक्रिया पर दोबारा विचार करने और इसकी गहन समीक्षा किए जाने की मांग भी उठाई।
नवीन पटनायक ने विधानसभा के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच कथित गंभीर मतभेदों को देखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि एसआईआर से जुड़े फैसलों और पूरी प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा जरूरी है।
चुनाव आयोग में मतभेद की रिपोर्ट के बाद बयान
पटनायक की यह मांग एक समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट के बाद सामने आई। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े कई फैसलों और निर्देशों को लेकर तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के भीतर मतभेद सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाता सूची से नाम हटाने और नए नाम जोड़ने, नए मतदाताओं के लिए आवेदन फॉर्म में बदलाव तथा मतदाता संबंधी आंकड़ों तक पहुंच जैसे मुद्दों पर चुनाव आयुक्तों के बीच असहमति रही है। एक समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी।
‘बीजद शुरू से एसआईआर का विरोध करती रही’
नवीन पटनायक ने कहा कि बीजद शुरुआत से ही विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया का विरोध करती रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को आगे भी मजबूती से उठाएगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या बीजद मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतरेगी, तो पटनायक ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को “बहुत मजबूती से” उठाएगी।
बीजद का 25 लाख नाम हटाए जाने का दावा
बीजद पहले भी ओडिशा में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कई विसंगतियों का आरोप लगा चुकी है। पार्टी का दावा है कि मतदाता सूची से 25 लाख से अधिक पात्र मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। बीजद का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने से पहले राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने केवल 3.16 करोड़ मतदाताओं के नाम का मिलान किया था। पार्टी के अनुसार, करीब 25 लाख मतदाताओं के नामों का मिलान नहीं किया गया और बाद में उन्हें सूची से बाहर कर दिया गया। हालांकि, ये आंकड़े और आरोप बीजद की ओर से किए गए दावों के रूप में सामने आए हैं।
मतदाता संख्या में बदलाव को लेकर भी सवाल
बीजद के महासचिव भृगु बक्शीपात्र ने हाल में एक संवाददाता सम्मेलन में ओडिशा की मतदाता संख्या में बदलाव को लेकर सवाल उठाए थे। उनका दावा था कि 2024 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले राज्य में 3.26 करोड़ मतदाता थे। उनके अनुसार, चुनाव के दौरान यह संख्या बढ़कर 3.32 करोड़ हो गई। मतदान के कुछ दिनों बाद मतदाताओं की संख्या 3.36 करोड़ और वर्ष 2025 तक 3.40 करोड़ होने का दावा भी उन्होंने किया। बीजद ने इन आंकड़ों के आधार पर मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं।
21 सितंबर को जारी हुई अंतिम मतदाता सूची
ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आर.एस. गोपालन ने 21 सितंबर को राज्य की अंतिम मतदाता सूची जारी की थी। इसमें 3.16 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल होने की बात कही गई। बीजद का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने से पहले बड़ी संख्या में मतदाताओं के नामों का मिलान नहीं किया गया था। पार्टी ने इस संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण और समीक्षा की मांग की है।
13 करोड़ नाम हटाए जाने की खबरों की जांच की मांग
विपक्षी दल ने उन खबरों की जांच की मांग भी की है, जिनमें दावा किया गया है कि 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मसौदा मतदाता सूचियों से करीब 13 करोड़ नाम हटाए गए हैं। बीजद का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों और आम मतदाताओं के बीच पारदर्शिता और चुनाव आयोग की निष्पक्षता से जुड़े सवाल उठ रहे हैं।
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर बीजद ने जताई चिंता
दो दिन पहले बीजद के एक प्रवक्ता ने कहा था कि पार्टी और अन्य राजनीतिक दल चुनाव आयोग की स्वतंत्रता तथा निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों से चिंतित हैं। बीजद नेता लेनिन मोहंती ने कहा था कि ऐसी स्थिति “एक जीवंत लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं” है। पार्टी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर स्पष्टता की मांग की है।
2024 में बदला ओडिशा का राजनीतिक परिदृश्य
ओडिशा में 2024 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 24 वर्षों से सत्ता में रही बीजद को हराया था। इसके बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ। लोकसभा चुनाव में भी बीजद को बड़ा झटका लगा। राज्य की 21 लोकसभा सीटों में से भाजपा ने 20 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को एक सीट मिली। बीजद एक भी लोकसभा सीट जीतने में सफल नहीं रही।
एसआईआर को लेकर राजनीतिक विवाद जारी
ओडिशा में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर बीजद के आरोपों के बीच मतदाता सूची, नामों के मिलान और मतदाताओं की संख्या में बदलाव का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। नवीन पटनायक की मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग ने इस विवाद को और तेज कर दिया है। बीजद का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया की स्वतंत्र और गहन समीक्षा होनी चाहिए, जबकि मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों और नामों में बदलाव को लेकर पार्टी लगातार स्पष्टीकरण की मांग कर रही है।