नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सोमवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी की उस याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया, जिसमें टोक्यो के रेंकोजी मंदिर से उनकी (नेताजी) ‘अस्थियां’ वापस लाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त को नेताजी की बेटी अनीता बी फाफ की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सोमवार को न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना के पीठ से अनुरोध किया कि सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया जाए।
हस्तक्षेपकर्ता की याचिका का विरोध
अनीता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने एक हस्तक्षेपकर्ता की अर्जी का विरोध किया, जो मामले में दखल देने की कोशिश कर रहा था। हस्तक्षेपकर्ता यह आरोप लगाते हुए अनीता फाफ की याचिका का विरोध कर रहा था कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे साबित हो कि वह (अनीता फाफ) नेताजी की बेटी हैं। प्रधान न्यायाधीश ने सिंघवी की आपत्ति का संज्ञान लेते हुए कहा कि पीठ आवेदक को अपनी दलीलें रखने से नहीं रोक सकता।
नेताजी के अवशेषों को भारत लाने की मांग
इससे पहले, सिंघवी ने कहा था कि अनीता फाफ ने ‘लगातार और सार्वजनिक रूप से मांग की है कि उनके पिता के पार्थिव अवशेषों को सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार के लिए भारत वापस लाया जाए।’ अगस्त 1945 में नेताजी के गायब होने को लेकर कई तरह की बातें कही जाती हैं। कुछ रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उनके अवशेष टोक्यो के रेंकोजी मंदिर में सुरक्षित रखे गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस साल मार्च में नेताजी के पड़पोते की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था, जिसमें रेंकोजी मंदिर में रखी गई नेताजी की ‘अस्थियों’ को भारत लाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। न्यायालय ने कहा था, ‘उनकी वारिस (नेताजी की बेटी) हमारे सामने नहीं हैं। अगर वह चाहती हैं कि अस्थियों को भारत लाया जाए, तो उन्हें पीठ के सामने आना होगा।’ उसने कहा था,‘हम उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि उनकी भावनाओं को कानूनी कार्रवाई का रूप दिया जाए। लेकिन उन्हें आगे आना होगा।’ सुप्रीम कोर्ट के याचिका पर सुनवाई करने से मना करने के बाद याचिकाकर्ता आशीष रे की ओर से पेश वकील ने उसे वापस लेने का अनुरोध किया था। न्यायालय ने आशीष रे को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी थी।