कोलकाता : पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष Samik Bhattacharya ने स्पष्ट कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के बागी या असंतुष्ट विधायकों को भारतीय जनता पार्टी में शामिल नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा अपनी विचारधारा और संगठनात्मक संस्कृति से समझौता नहीं करेगी और "भाजपा का तृणमूलकरण कभी नहीं होगा।"
समिक भट्टाचार्य ने कहा, "तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के लिए हमारे दरवाजे बंद हैं। हमने बिना किसी बाहरी नेता को शामिल किए 207 सीटें हासिल की हैं। जनता ने तृणमूल नेताओं और उनकी राजनीति के खिलाफ मतदान किया है। ऐसे में जिन लोगों के खिलाफ जनता ने फैसला दिया है, उन्हें भाजपा में शामिल करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।"
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा की नई राजनीतिक रणनीति जमीनी स्तर से संगठन को मजबूत करने पर केंद्रित है। पार्टी ऐसे लोगों को प्राथमिकता दे रही है जो लंबे समय से संगठन के साथ जुड़े हुए हैं और जिन्होंने पार्टी के लिए संघर्ष किया है।
भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि जिन नेताओं पर भ्रष्टाचार या अन्य गंभीर आरोप लगे हैं, उन्हें भाजपा में शामिल करने का कोई औचित्य नहीं है। "दागी लोगों को हम अपनी पार्टी में कैसे शामिल कर सकते हैं?" उन्होंने सवाल उठाया।
इस बयान को पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष और गुटबाजी की चर्चाएं तेज रही हैं। राजनीतिक हलकों में ऐसी अटकलें भी लगाई जा रही थीं कि तृणमूल के कुछ नेता भाजपा का रुख कर सकते हैं।
इसी बीच तृणमूल कांग्रेस की एक बैठक भी चर्चा में रही, जिसमें पार्टी के कई विधायक अनुपस्थित बताए गए। हालांकि पार्टी की ओर से दावा किया गया था कि कई विधायक और कार्यकर्ता अन्य राजनीतिक कार्यक्रमों और विरोध प्रदर्शनों में व्यस्त थे।
भाजपा अध्यक्ष के इस बयान ने साफ संकेत दे दिया है कि पार्टी फिलहाल तृणमूल कांग्रेस से आने वाले नेताओं को लेकर कोई नरम रुख अपनाने के मूड में नहीं है। इससे बंगाल की राजनीति में आने वाले दिनों में नए समीकरण बनने की संभावना और बढ़ गई है।