कोलकाता : पश्चिम बंगाल की तीन रिक्त राज्यसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले भाजपा के संभावित उम्मीदवारों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पार्टी इन तीनों सीटों पर पूर्व तृणमूल नेताओं को उम्मीदवार बनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि इससे भाजपा एक ओर तृणमूल में हुई टूट को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्षी एकता पर भी सवाल खड़े करेगी।
सूत्रों के मुताबिक, पूर्व राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय का नाम लगभग तय माना जा रहा है। उनके अलावा पूर्व तृणमूल सांसद प्रकाश चिक बड़ाइक तथा पूर्व सांसद सुष्मिता देव के नामों पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। हालांकि, भाजपा ने अब तक अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। पार्टी नेतृत्व अंतिम समय तक राजनीतिक समीकरणों और जीत की संभावनाओं का आकलन करने के बाद ही उम्मीदवारों के नाम घोषित कर सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा इन नेताओं को उम्मीदवार बनाती है तो यह तृणमूल के लिए राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक दोनों स्तरों पर चुनौती होगी। दूसरी ओर, तृणमूल खेमे ने भी स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि पूर्व तृणमूल नेता भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरते हैं तो उन्हें "विश्वासघाती" बताकर जनता के बीच मुद्दा बनाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, विशेष रूप से सुखेंदु शेखर राय को लेकर तृणमूल आक्रामक रुख अपना सकती है और उनके दल बदलने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी।
उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग ने तीनों रिक्त राज्यसभा सीटों के लिए 24 जुलाई को मतदान और मतगणना की घोषणा की है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 14 जुलाई, नामांकन पत्रों की जांच 15 जुलाई तथा नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 17 जुलाई निर्धारित की गई है। ऐसे में अब सभी की निगाहें भाजपा और तृणमूल की उम्मीदवार सूची पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इन चुनावों के नतीजे राज्य की बदलती राजनीतिक दिशा और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दलों की रणनीति का महत्वपूर्ण संकेत देंगे।