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रवींद्र सरोवर में ‘पक्षी बनाम मानव’ बहस तेज

दिव्यांग बच्चों के प्ले एरिया और जैव विविधता संरक्षण पर विवाद

कोलकाता : Rabindra Sarobar स्थित लायंस सफारी पार्क में प्रस्तावित प्ले एरिया को लेकर नई बहस छिड़ गई है। एक ओर लायंस क्लब दिव्यांग बच्चों के लिए सुलभ खेल क्षेत्र विकसित करना चाहता है, तो दूसरी ओर प्रकृतिवादी और पक्षी प्रेमी इसे जैव विविधता के लिए खतरा बता रहे हैं।

विवाद का केंद्र सफारी पार्क के लगभग 13,000 वर्ग फुट क्षेत्र की खुदाई है, जहां पहले ‘लाफिंग क्लब’ गतिविधियां होती थीं। पार्क अध्यक्ष एस. एस. राजपूत के अनुसार, यह परियोजना दिव्यांग बच्चों के लिए है और इसमें स्पास्टिक्स व ऑटिज्म सोसाइटी के सदस्यों से परामर्श लिया गया है। व्हीलचेयर की सुगमता के लिए क्षेत्र में टाइल्स बिछाने की योजना है, जिस पर 15-20 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।

हालांकि, पक्षी प्रेमियों का कहना है कि कच्ची जमीन को पक्का करने से सूक्ष्म आवास (माइक्रो-हैबिटैट) नष्ट हो जाएंगे। पक्षी विशेषज्ञ तीर्थंकर रॉयचौधरी ने कहा कि पत्तों की परत और ऊपरी मुलायम मिट्टी स्किंक, केंचुए और कीटों के लिए आवश्यक है, जो जमीन पर भोजन खोजने वाले पक्षियों का मुख्य आहार हैं।

हाल ही में दुर्लभ प्रवासी पक्षी स्लैटी-बैक्ड फ्लाइकैचर की उपस्थिति ने इस क्षेत्र की पारिस्थितिक महत्ता को और रेखांकित किया है। प्रकृतिवादी अर्जन बसु रॉय के अनुसार, इंडियन पिट्टा, ऑरेंज-हेडेड थ्रश, स्केली थ्रश और इंडियन ब्लू रॉबिन जैसे पक्षी कच्ची जमीन पर निर्भर रहते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि रवींद्र सरोवर परिसर में 213 प्रजातियों के पक्षी, 70 से अधिक तितली प्रजातियां और 25 ओडोनेट प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनका केंद्र सफारी पार्क है। तितली विशेषज्ञ सप्तर्षि चटर्जी ने चेतावनी दी कि पक्कीकरण से स्थानीय तितली आबादी में गिरावट आ सकती है।

राजपूत का तर्क है कि प्राथमिकता पहले मानवों, विशेषकर दिव्यांग बच्चों को मिलनी चाहिए। वहीं, प्रकृतिवादियों का कहना है कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए प्रकृति की रक्षा अनिवार्य है।

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