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अंडमान निकोबार में एशियन वॉटरबर्ड सेंसस जारी, 40 से अधिक प्रजातियां दर्ज

आर्द्रभूमि पक्षी और आवास की स्थिति का सर्वेक्षण शुरू

स्वयंसेवी पक्षी‑प्रेमियों और विभागीय समर्थन हो रहा प्राप्त

अंडमान एवियंस क्लब के नेतृत्व में 3 से 18 जनवरी तक सर्वे

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : वेटलैंड्स इंटरनेशनल द्वारा एशियाई उपमहाद्वीप में आर्द्रभूमि पक्षी आबादी की निगरानी और आर्द्रभूमि आवासों की स्थिति का आकलन करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आयोजित किया जाने वाला एशियन वॉटरबर्ड सेंसस वर्तमान में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में जारी है। इस जनगणना का आयोजन कई वर्षों से कर रहा अंडमान एवियंस क्लब इस वर्ष भी सर्वेक्षण को आगे बढ़ा रहा है। यह गणना 3 जनवरी 2026 से प्रारंभ होकर 18 जनवरी 2026 तक चलेगी। इस वर्ष अंडमान एवियंस क्लब ने सभी संबंधित हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पर्यावरण एवं वन विभाग, अंडमान एवं निकोबार प्रशासन, शिक्षा निदेशालय, अंडमान निकोबार एन्वायरनमेंट टीम–दक्षिण फाउंडेशन, द नैचुरलिस्ट स्कूल, बेंगलुरु तथा ट्राइबमेन डॉट इन जैसी संस्थाओं के साथ सहयोग किया है। 11 जनवरी की सुबह क्लब के पक्षीप्रेमी गवर्नमेंट स्कूल, ओग्राबराज के निकट एकत्र हुए। सर्वेक्षण में एनेट, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, ट्राइबमेन डॉट इन, वन विभाग के कर्मचारी, जीएसएसएस तुष्णाबाद और जीएमएस ओग्राबराज के शिक्षक, कक्षा छह से आठ तक के छात्र, समीपवर्ती आईआरबीएन परिसर के कर्मचारियों के बच्चे तथा आईटीआई डॉलीगंज के पर्यटन छात्र शामिल हुए। छात्रों के साथ आए कुछ अभिभावकों ने भी स्वेच्छा से इस गतिविधि में भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), पर्यावरण एवं वन विभाग, दिनेश कन्नन उपस्थित रहे। उनके साथ दक्षिण अंडमान के उप वन संरक्षक (वन्यजीव) संदीप बेहड़ा भी मौजूद थे। इस अवसर पर पर्यटन सचिव ज्योति कुमारी की उपस्थिति भी रही। प्रतिभागियों को समूहों में विभाजित कर टीम गाइड नियुक्त किए गए। उन्हें आर्द्रभूमि आवासों और उनसे जुड़े पक्षी प्रजातियों, दूरबीन के उपयोग तथा चेकलिस्ट तैयार करने के बारे में जानकारी दी गई, जिसके बाद उन्हें ओग्राबराज आर्द्रभूमि के किनारे पक्षी भ्रमण पर ले जाया गया। सर्वेक्षण के अंत तक 40 से अधिक पक्षी प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया, जिनमें स्थानीय अंडमान टीम की स्वस्थ आबादी भी शामिल है। एकत्र किए गए आंकड़े ई-बर्ड पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे, जिसके माध्यम से एशियन वॉटरबर्ड सेंसस परियोजना की निगरानी की जा रही है। प्रतिभागियों के लिए एक विशेष आकर्षण न्यूयॉर्क से आए एंड्रयू और उनकी पत्नी श्रीमती पूजा शर्मा की उपस्थिति रही। एंड्रयू कॉर्नेल लैब से जुड़े हैं, जिसने ई-बर्ड एप्लिकेशन विकसित किया है। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए संरक्षण गतिविधियों में स्कूली बच्चों की उत्साही भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त की। सभा को संबोधित करते हुए दिनेश कन्नन ने बीज प्रसार और वनों के पुनर्जीवन में पक्षियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित पक्षियों के अवैध शिकार को रोकने की आवश्यकता पर बल दिया।

धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए अंडमान एवियंस क्लब के अध्यक्ष डॉ. अश्विनी कुमार ने छात्रों से अपने घरों और विद्यालयों के आसपास पक्षियों को देखकर बर्डवॉचिंग को शौक के रूप में अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने अधिक से अधिक स्वयंसेवकों से क्लब से जुड़ने और पक्षियों व उनके आवासों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। एशियन वॉटरबर्ड सेंसस को ई-बर्ड इंडिया, बर्ड काउंट इंडिया, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और वेटलैंड्स इंटरनेशनल का सहयोग प्राप्त है। एशिया भर में इस गणना की अवधि 1 दिसंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक है, जबकि भारत में मुख्य सर्वेक्षण अवधि 3 जनवरी से 18 जनवरी 2026 तक निर्धारित है। अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में अंडमान एवियंस क्लब द्वारा यह गणना 3 से 18 जनवरी 2026 के दौरान डिगलीपुर से ग्रेट निकोबार तक पूरे केंद्रशासित प्रदेश में की जा रही है। कुछ दूरस्थ द्वीपों में यह सर्वेक्षण 28 फरवरी 2026 से पहले पूरा किया जाएगा, यह जानकारी अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के ई-बर्ड क्षेत्रीय समन्वयक अमृत राहा ने दी।

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