नई दिल्ली : कांग्रेस नेता Shashi Tharoor ने पश्चिम एशिया संकट पर India के रुख को “जिम्मेदार कूटनीति” का उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील हालात में संयम दिखाना कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत का संकेत है।
थरूर ने कहा, “संयम समर्पण नहीं है, बल्कि यह ताकत है। इससे यह दिखता है कि हम अपने हितों को समझते हैं और सबसे पहले उनकी रक्षा के लिए कदम उठाते हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत जैसे देशों को तनाव कम करने में रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि भारत को कूटनीतिक पहल करते हुए दोनों पक्षों के बीच शांति स्थापित करने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सके। उनके अनुसार, देशों को ऐसा माहौल बनाना चाहिए जिसमें दोनों पक्ष तनाव कम करने के लिए कदम उठा सकें।
थरूर ने सरकार के मौजूदा रुख का समर्थन करते हुए यह भी कहा कि Iran के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के निधन पर भारत को पहले ही संवेदना व्यक्त करनी चाहिए थी, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि “निंदा” और “संवेदना” में अंतर होता है—संवेदना सहानुभूति व्यक्त करने का तरीका है, जबकि निंदा एक कड़ा राजनीतिक रुख होता है। थरूर के इस बयान के बाद विदेश नीति और कूटनीतिक संतुलन को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।