कोलकाता: बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन लगभग 19 साल बाद शुक्रवार को कोलकाता पहुंचीं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद उन्होंने कहा, "मुझे यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है।"
यह 2007 के बाद कोलकाता में उनकी पहली सार्वजनिक मौजूदगी है। उस समय उनकी पुस्तक 'द्विखंडित' को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद उन्हें शहर छोड़ना पड़ा था। इससे पहले 2003 में तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने धार्मिक भावनाएं आहत होने का हवाला देते हुए इस पुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया था। फिलहाल 63 वर्षीय तस्लीमा नसरीन दिल्ली में दीर्घकालिक रेजिडेंस परमिट पर रह रही हैं।
तस्लीमा नसरीन शनिवार को रवींद्र सदन में आयोजित कट्टरवाद विरोधी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। कार्यक्रम में उनके कविता पाठ और चर्चा में भाग लेने का भी कार्यक्रम है। आयोजकों के अनुसार, उनका नागरिक अभिनंदन भी किया जाएगा।
कोलकाता लौटने पर तस्लीमा ने कहा कि उन्होंने कभी अपनी इच्छा से यह शहर नहीं छोड़ा था। उनके अनुसार, तत्कालीन पश्चिम बंगाल सरकार ने उन्हें राज्य छोड़ने के लिए मजबूर किया था, लेकिन उन्हें हमेशा उम्मीद थी कि एक दिन वह फिर लौटेंगी।
उनके दौरे को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। तृणमूल कांग्रेस विधायक अखरुज्जमान ने उनके आगमन पर सवाल उठाए, जबकि राज्य सरकार की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि तस्लीमा नसरीन की वापसी राज्य के लिए गर्व का विषय है।