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तारातला गोदाम हादसा: जांच में बड़ा खुलासा

निर्माण में नियमों की अनदेखी का आरोप, कमजोर ढांचे के कारण गिरा तीन मंजिला हिस्सा; अब तक 16 लोगों की मौत

कोलकाता : तारातला गोदाम हादसे की जांच में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। शुरुआती जांच रिपोर्ट के मुताबिक, गोदाम के निर्माण के दौरान बुनियादी वैज्ञानिक मानकों का पालन नहीं किया गया था। जांचकर्ताओं का दावा है कि कंक्रीट की ढलाई सीधे खुली टिन की चादरों पर की जा रही थी, जो भारी वजन संभालने के लिए तैयार नहीं थीं।

जांच में सामने आया है कि जिन टिन की चादरों पर कंक्रीट डाला गया था, उन्हें लोहे के बीम से मजबूती से जोड़ा ही नहीं गया था। टिन को केवल आपस में स्क्रू के जरिए जोड़ा गया था, जबकि बीम के साथ मजबूत पकड़ जरूरी थी।

ढलाई का वजन नहीं संभाल पाई टिन की चादरें

प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, ढलाई के कुछ समय बाद ही सीमेंट और रेत का मिश्रण टिन की सतह से खिसकने लगा और अचानक पूरा हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया।

जांचकर्ताओं का मानना है कि निर्माण की शुरुआत से ही नक्शे और संरचना में खामियां थीं। जिस हिस्से में हादसा हुआ, वहां तीन मंजिला भाग में टिन की छत के ऊपर कंक्रीट की ढलाई की जा रही थी।

विशेषज्ञों ने इस स्थिति की तुलना कच्‍चे पत्ते पर पानी डालने से की है, जहां पानी टिकने के बजाय फिसल जाता है। उनका कहना है कि कमजोर आधार के कारण ढलाई अपनी जगह नहीं टिक पाई।

छत निर्माण में इस्तेमाल सामग्री पर भी सवाल

जांच में यह भी सामने आया है कि ढलाई के दौरान 8 एमएम की सरिया का इस्तेमाल किया गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक, इतने बड़े क्षेत्र की छत के लिए यह पर्याप्त था या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।

इसके अलावा यह भी आरोप है कि अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग गुणवत्ता का मिश्रण इस्तेमाल किया गया था। कमजोर संरचना के कारण बीच का हिस्सा पहले धंसा और उसके बाद लोहे के बीम भी टूट गए।

हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत

तारातला गोदाम हादसे के पांचवें दिन भी राहत और बचाव कार्य जारी है। इस घटना में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई घायल अभी भी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।

मामले में पुलिस ने अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियां निर्माण प्रक्रिया, जिम्मेदार लोगों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।

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