सबिता, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को धनधान्य ऑडिटोरियम में आयोजित मेधावी परीक्षार्थियों के सम्मान समारोह में शामिल होकर छात्र -छात्राओं का हौसला बढ़ाया और उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। यूरोप के कई शीर्ष शिक्षण संस्थानों में बंगाल के प्रतिभाशाली लोग नेतृत्व कर रहे हैं। मेधावी परीक्षार्थियों के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि हम चाहते हैं कि वह प्रतिभा पश्चिम बंगाल में ही रहे। इस दिन राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से माध्यमिक, उच्च माध्यमिक, मदरसा बोर्ड और केंद्रीय बोर्ड (CBSE और ICSE) की परीक्षाओं में सफल छात्रों के लिए सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। उच्च माध्यमिक के परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री ने प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले आदृत पाल से वीडियो कॉल पर बात की थी। उसी समय उन्होंने मेधावी छात्रों को सम्मानित करने की घोषणा की थी।
मुख्यमंत्री ने निजी स्कूलों को दिया बड़ा संदेश
सीएम शुभेंदु ने राज्य के निजी शिक्षण संस्थानों के लिए संदेश देते हुए कहा कि फीस लेने में ऐसा न करें कि सामान्य परिवारों को कठिनाई हो और सरकार असहज स्थिति में पड़े। उन्होंने छात्रों के मूल्यांकन के मामले में निजी शिक्षण संस्थानों को और अधिक सावधानी बरतने की सलाह भी दी। मेरी निजी शिक्षण संस्थानों से अपील है कि वे फीस या सेमेस्टर फीस लेने के तरीके पर वित्तीय नियंत्रण रखे। उन्होंने आगे कहा, आप भी अभी से सोचना शुरू कर दें। ऐसा कुछ भी न करें जिससे सरकार शर्मिंदा हो। ऐसा कुछ भी न करें जिससे एक साधारण परिवार के बच्चों को कठिनाई हो। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा, निजी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश बहुत आसान है। कृपया मूल्यांकन में थोड़ी सावधानी बरतें। मूल्यांकन योग्यता के आधार पर होना चाहिए, अन्यथा जब सरकारी शिक्षा प्रणाली के हमारे छात्र प्रतिस्पर्धा करते हैं, तो वे निजी शिक्षा प्रणाली के साथ प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाते हैं। इस संबंध में भी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता है। आधुनिक शिक्षा में पैसा कोई बाधा नहीं बनेगा।
आने वाले दिनों में बंगाल को शिक्षा का केन्द्र बनाना चाहते हैं : शुभेंदु अधिकारी
मुख्यमंत्री ने छात्रों को स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए सच्ची शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया। आने वाले दिनों में वे बंगाल को शिक्षा का केन्द्र बनाना चाहते हैं। सोमवार को ही राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने घोषणा की कि धर्म आधारित सहायता परियोजनाएं बंद की जाएंगी। इसके कुछ घंटों बाद उसी विषय का उल्लेख करते हुए कार्यक्रम में सीएम ने कहा, “हम इस बार ‘विवेकानंद मेरिट स्कॉलरशिप योजना’ शुरू करेंगे।” उन्होंने ईश्वर चंद्र विद्यासागर की सोच के अनुसार महिला शिक्षा को विशेष प्राथमिकता देने का भी उल्लेख किया। मेधावी छात्रों से उनका आग्रह है, “कभी-कभी स्मार्टफोन पर पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के भाषण और संवाद सुना करें।” आपकी सरकार आपके साथ है। उन्होंने कहा कि जातीय शिक्षा नीति से जुड़ने का फैसला लिया गया है। सरकार स्मार्ट क्लास रूम से लेकर खेलकूद में कई अहम कठम उठायेगी और कुछ दिन में इसका परिणाम भी देखने को मिलेगा। कारीगरी शिक्षा में भी अहम कदम उठाये जायेंगे। हमलोग बात कम और काम ज्यादा करना चाहते हैं।