स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती  
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प्रयागराज : ‘भारी मन’ से विदा हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

हाई कोर्ट में याचिका दायर

प्रयागराज/लखनऊ : माघ मेले में मौनी अमावस्या पर प्रशासन द्वारा स्नान करने से रोकने के बाद शंकराचार्य शिविर के बाहर धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बुधवार को भारी मन से मेले से विदा हो गए। इसके बाद समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए सत्तारूढ़ दल पर सदियों पुरानी सनातन परंपराओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया। माघ मेले से प्रस्थान से पूर्व सरस्वती ने कहा कि आज शब्द साथ नहीं दे रहे हैं और स्वर बोझिल हैं। प्रयाग की इस पवित्र धरती पर हम आध्यात्मिक शांति की कामना लेकर आते हैं, लेकिन आज यहां से एक ऐसी रिक्तता और भारी मन लेकर लौटना पड़ रहा है जिसकी कल्पना हमने कभी नहीं की थी। उल्लेखनीय है कि मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी पर सवार होकर स्नान के लिए संगम जा रहे थे। अत्यधिक भीड़ होने के कारण प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने उन्हें पालकी से उतरकर स्नान के लिए जाने को कहा जिसको लेकर विवाद खड़ा हो गया। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दौरान तैनात अधिकारियों व सुरक्षा जवानों ने संतों के साथ बर्बरता दिखाई। उनकी चोटी पकड़कर घसीटा गया।

ये हैं आरोप

जबकि मेला प्रशासन ने आरोप लगाया था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थक पांटून पुल का बैरियर तोड़कर घाट की तरफ बढ़े। इससे पुलिस प्रशासन को व्यवस्था में संभालने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस घटना के बाद से सरस्वती और पुलिस प्रशासन के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर चला और वह माघ मेले में स्नान किए बगैर बुधवार को प्रस्थान कर गए।

हाई कोर्ट में याचिका दायर

माघ मेले में मौनी अमावस्या पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों को पुलिस द्वारा संगम स्नान करने से रोके जाने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता गौरव द्विवेदी द्वारा दायर इस याचिका में 18 जनवरी, 2026 की घटना की जांच CBI से कराने का अनुरोध किया गया है। इसके अलावा राज्य सरकार को तत्काल प्रभाव से प्रयागराज की मंडलायुक्त, जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त और मेला अधिकारी को हटाने और इनके स्थान पर नए अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश जारी करने का भी अनुरोध किया गया है। याचिका में इस पूरे प्रकरण में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का भी अदालत से अनुरोध किया गया है। याचिका में प्रमुख सचिव (गृह), डीजीपी, मंडलायुक्त, जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त और मेला अधिकारी को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि माघ मेले के सबसे पवित्र स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर प्रशासन द्वारा किसी भी तरह की मनमानी भरा हस्तक्षेप संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रदत्त धार्मिक आचरण के मूल अधिकारों का हनन है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अविमुक्तेश्वरानंद और उनके अनुयायी स्नान के लिए संगम की तरफ बढ़ रहे थे, तभी पुलिस प्रशासन ने उन्हें पालकी में जाने से रोक दिया और पैदल जाने को विवश किया। इससे टकराव की स्थिति बनी। पुलिस द्वारा शिष्यों से मारपीट की गई और 11 से 14 साल के बटुकों को अवैध रूप से हिरासत में लेकर मारा पीटा गया।

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