कर्नाटक लोक सेवा आयोग का परिसर 
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KPSC परीक्षा घोटाले में निलंबित अध्यक्ष और सदस्य गिरफ्तार

ED ने की बड़ी कार्रवाई

Kamlesh Pandey

बेंगलुरु : कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की ओर से आयोजित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार से जुड़े धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने KPSC के निलंबित अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार और आयोग की सदस्य बी. वी. गीता को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों को 6 अक्टूबर को धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत हिरासत में लिया गया।

400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती जांच के केंद्र में

ED की जांच मुख्य रूप से KPSC द्वारा 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ी है। इस मामले में कर्नाटक पुलिस ने कई प्राथमिकी दर्ज की थीं। इन्हीं प्राथमिकी को आधार बनाकर केंद्रीय एजेंसी ने धनशोधन के पहलू से जांच शुरू की। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर परीक्षा और चयन प्रक्रिया में हेरफेर के जरिए हासिल की गई रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

प्रति उम्मीदवार 70 से 80 लाख रुपये रिश्वत का आरोप

ED के अनुसार, मामले में कुछ कथित बिचौलियों ने उम्मीदवारों से संपर्क किया था। आरोप है कि चयन में मदद करने के नाम पर प्रति उम्मीदवार 70 लाख रुपये से 80 लाख रुपये तक की रिश्वत मांगी गई। एजेंसी अब कथित रिश्वत की रकम के स्रोत, लेनदेन और उसके लाभार्थियों का पता लगाने में जुटी है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या रिश्वत की रकम को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ऐसी संपत्तियों अथवा वित्तीय लेनदेन में लगाया गया, जिससे वह धनशोधन की श्रेणी में आती हो। 

पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां

यह इस मामले में ED की पहली बड़ी कार्रवाई नहीं है। इससे पहले एजेंसी ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग के पूर्व परीक्षा नियंत्रक और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार तथा कथित बिचौलिए बसवराज कनाले को गिरफ्तार किया था। इन गिरफ्तारियों के बाद जांच का दायरा बढ़ा और आयोग के भीतर परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों तथा कथित बिचौलियों की भूमिका की भी पड़ताल शुरू हुई।

प्रश्नपत्र लीक और OMR में छेड़छाड़ के आरोप

मामले में जांच केवल कथित रिश्वतखोरी तक सीमित नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक, एजेंसी प्रश्नपत्र लीक होने, OMR उत्तर पुस्तिकाओं में कथित छेड़छाड़ और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोपों की भी जांच कर रही है। आरोपों का एक गंभीर पहलू यह भी है कि कथित तौर पर KPSC अधिकारियों के कुछ रिश्तेदारों को अंतिम चयन में फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। यदि जांच में ये आरोप साबित होते हैं, तो इससे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

अब आगे क्या होगा?

सूत्रों के अनुसार, साहूकार और गीता की गिरफ्तारी के बाद ED कथित धन के लेनदेन, उम्मीदवारों और बिचौलियों के बीच संपर्क तथा KPSC के अधिकारियों की भूमिका से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर सकती है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित रिश्वतखोरी का नेटवर्क कितना व्यापक था और इससे कितने उम्मीदवार प्रभावित हुए।

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