सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : जी.बी. पंत अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार गिरती गुणवत्ता को लेकर हिंदू राष्ट्र शक्ति के राज्य युवा अध्यक्ष अंग्शुमन रॉय ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल को एक विस्तृत पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, जिसमें उन्होंने इसे “गंभीर स्वास्थ्य संकट” बताया है। उपराज्यपाल को भेजे गए पत्र का हवाला देते हुए रॉय ने कहा कि जी.बी. पंत अस्पताल द्वारा जारी एक हालिया परिपत्र में खुलासा किया गया है कि आवश्यक एनेस्थेटिक दवाएं पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं और अब केवल अत्यंत सीमित मात्रा ही उपलब्ध है, वह भी केवल आपातकालीन मामलों के लिए। उन्होंने बताया कि इस कमी के कारण सभी वैकल्पिक सर्जरियों को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है,” जिससे उन मरीजों के लिए खतरनाक स्थिति पैदा हो गई है जिन्हें त्वरित चिकित्सा की आवश्यकता है। अपने पत्र में रॉय ने इसे “बेहद चिंताजनक” बताते हुए लिखा कि यह कमी “आवश्यक दवाओं की खरीद और अस्पताल प्रबंधन में गंभीर प्रशासनिक चूक” को दर्शाती है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे विफल कदम न केवल मरीजों के जीवन को खतरे में डालते हैं बल्कि द्वीप समूह के प्रमुख सरकारी अस्पताल पर जनता के भरोसे को भी कमजोर करते हैं। उन्होंने लिखा कि जी.बी. पंत अस्पताल को पूरे केंद्र शासित प्रदेश की तृतीयक स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है और जीवनरक्षक एनेस्थेटिक दवाओं की कमी “प्रणालीगत समस्याओं की ओर संकेत करती है जिनका तुरंत समाधान आवश्यक है।” उन्होंने प्रशासन से इस कमी के मूल कारणों की जांच कराने, जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी चूक न होने देने की मांग की। पत्र में रॉय ने चिकित्सा उपकरण और दवाओं की खरीद के लिए प्रचलित जीईएम पोर्टल प्रणाली की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली देरी, प्रक्रियागत अड़चनों और जवाबदेही की कमी के कारण अत्यंत अप्रभावी साबित हुई है। उन्होंने मांग की कि चिकित्सा संबंधी सामग्रियों के लिए जीईएम आधारित खरीद प्रणाली को तुरंत समाप्त कर अधिक प्रभावी और स्वास्थ्य-उन्मुख खरीद प्रणाली लागू की जाए।
मरीजों पर पड़ रहे प्रभाव का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा कि जिन व्यक्तियों की सर्जरी या इलाज इस संकट के कारण नहीं हो पा रहा है, उन्हें “कदापि कष्ट नहीं उठाना चाहिए।” उन्होंने ऐसे मरीजों को तुरंत निजी अस्पतालों में स्थानांतरित किए जाने और सभी खर्चों को प्रशासन अथवा जी.बी. पंत अस्पताल द्वारा वहन करने की मांग की, ताकि जनता पर कोई आर्थिक बोझ न पड़े। तत्काल कार्रवाई की अपील करते हुए रॉय ने उपराज्यपाल से अनुरोध किया कि एनेस्थेटिक दवाओं की कमी के कारणों की तुरंत जांच कराई जाए, आवश्यक दवाओं की शीघ्र खरीद सुनिश्चित की जाए, दवा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जाए, चिकित्सा सामग्री के लिए जीईएम प्रणाली हटाई जाए और जी.बी. पंत अस्पताल में उपचार मानकों को उन्नत किया जाए। उन्होंने भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही को रोकने के लिए कड़े प्रशासनिक कदम उठाने की मांग भी की। अपने पत्र के अंत में रॉय ने जोर देकर कहा कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के नागरिक बड़े पैमाने पर जी.बी. पंत अस्पताल पर निर्भर हैं और जनता के स्वास्थ्य की रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने इस अत्यंत महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दे पर “शीघ्र और निर्णायक हस्तक्षेप” की आशा व्यक्त की।