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सुप्रीम कोर्ट के आदेश से शिक्षकों पर TET का संकट

शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य, 2028 तक परीक्षा पास करना जरूरी

Munmun Thakur

1 लाख शिक्षकों पर पड़ सकता है प्रभाव

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए प्राइमरी और अपर-प्राइमरी स्कूलों के सेवारत शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट आयोजित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। स्कूल शिक्षा विभाग ने प्राइमरी एजुकेशन बोर्ड और स्कूल सर्विस कमीशन से परीक्षा की संभावित तारीखों का पूरा शेड्यूल जल्द से जल्द उपलब्ध कराने को कहा है, जिससे 1 लाख से अधिक अप्रशिक्षित या बिना परीक्षा पास शिक्षकों की नौकरियां खतरे में पड़ती दिख रही हैं।

2028 तक पास करना होगा TET

शीर्ष अदालत ने देश भर के सभी शिक्षकों के लिए इस पात्रता परीक्षा को अनिवार्य कर दिया है, जिसके तहत परीक्षा पास करने की अंतिम समय-सीमा को बढ़ाकर साल 2028 तक कर दिया गया है। हालांकि, जिन शिक्षकों के रिटायरमेंट में 5 साल या उससे कम समय बचा है, उन्हें इस नियम से पूरी तरह छूट दी गई है। इसके बावजूद, राज्य में 90 हजार से अधिक ऐसे शिक्षक हैं जो इस अनिश्चितता के घेरे में हैं। शिक्षकों का मुख्य तर्क है कि जो लोग साल 2011 में शिक्षा के नियमों और राइट टू एजुकेशन एक्ट के लागू होने से बहुत पहले से सेवा में हैं, उन पर यह नई शर्त थोपना न्यायसंगत नहीं है। निखिल बंग प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा डाली गई पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद शिक्षकों की चिंता और गहरी हो गई है।

TET पर सरकार से शिक्षकों ने मांगा जवाब

शिक्षक संगठनों और नेताओं ने सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध किया है। बंगीय शिक्षक व शिक्षाकर्मी समिति के जनरल सेक्रेटरी स्वपन मंडल ने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले मौजूदा शिक्षकों को बचाने का वादा किया गया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद रुख बदल दिया गया है। वहीं, निखिल बंग प्राथमिक शिक्षक संघ ने सरकार से स्पष्ट योजना की मांग की है कि परीक्षा पास न करने वाले शिक्षकों का भविष्य क्या होगा।

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