नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) कवायद में लगे सात न्यायिक अधिकारियों को ‘‘बंधक’’ बनाए जाने की घटना का बृहस्पतिवार को गंभीरता से संज्ञान लेते हुए इसे निंदनीय बताया और ‘‘निष्क्रियता’’ को लेकर राज्य के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और अन्य अधिकारियों से जवाब देने को कहा। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने निर्वाचन आयोग को इस घटना की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) से कराए जाने का अनुरोध करने की अनुमति दी।
पीठ ने कहा कि यह घटना न्यायिक अधिकारियों का मनोबल तोड़ने और जारी चुनावी प्रक्रिया को रोकने के लिए ‘‘एक सोचा-समझा एवं निहित स्वार्थों से प्रेरित कदम’’ प्रतीत होती है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था तंत्र ‘‘ध्वस्त’’ हो गया है। उन्होंने इस मामले में कार्रवाई में देरी को लेकर राज्य के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि मालदा जिले में तीन महिलाओं समेत सात न्यायिक अधिकारियों को असामाजिक तत्वों ने बंधक बना लिया था। उन्होंने कहा कि बुधवार देर रात तक उन्हें खुद स्थिति पर नजर रखनी पड़ी। न्यायालय ने इस घटना के संबंध में मीडिया की खबरों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह ‘‘न केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने की खुलेआम की गई कोशिश है बल्कि इस न्यायालय के प्राधिकार को भी चुनौती देती है।’’
पीठ ने कहा कि वह किसी को भी न्यायिक अधिकारियों पर मनोवैज्ञानिक हमला करने के लिए कानून अपने हाथ में लेने और हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं देगी। उसने निर्वाचन आयोग से कहा कि एसआईआर कार्य में लगे न्यायिक अधिकारियों, उनके परिवारों और अन्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की मांग की जाए। न्यायालय ने कहा कि यह पश्चिम बंगाल सरकार और उसके अधिकारियों द्वारा ‘‘कर्तव्य का पालन नहीं किए जाने’’ का भी मामला है और उन्हें अपनी निष्क्रियता का कारण बताना होगा।
मालदा जिले के कलियाचक में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में शामिल सात न्यायिक अधिकारियों का कई घंटों तक घेराव किया, जिन्हें बाद में बचा लिया गया। सुरक्षा बलों ने बुधवार देर रात भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठियों का इस्तेमाल किया और तीन महिलाओं सहित न्यायिक अधिकारियों को बचाया। एसआईआर की प्रक्रिया में मतदाताओं के नामों को बड़े पैमाने पर हटाए जाने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को राष्ट्रीय राजमार्ग 12 (कोलकाता-सिलीगुड़ी) को भी अवरुद्ध कर दिया। न्यायिक अधिकारियों में तीन महिलाएं भी शामिल थीं जो कालियाचक-2 ब्लॉक विकास कार्यालय में मौजूद थीं जिसे प्रदर्शनकारियों ने शाम करीब चार बजे घेर लिया था। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों की एक बड़ी टुकड़ी ने आधी रात के बाद उन्हें बचाया।
अधिकारी ने बताया कि न्यायिक अधिकारियों को बीडीओ कार्यालय से बाहर लाया गया, जबकि प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बांस के खंभे लगाकर उनके वाहनों को रोकने की कोशिश की और कारों में तोड़फोड़ करने का प्रयास किया। एक अधिकारी ने बताया कि बचाव अभियान के दौरान पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठियां चलायीं। अधिकारी ने कहा, ‘‘प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने न्यायिक अधिकारियों को ले जा रहे वाहनों को रोकने और उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। हमारे कर्मियों को उनकी सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।’’ यह भी आरोप लगाया गया कि हंगामे के दौरान वाहनों की चपेट में आने से कुछ प्रदर्शनकारी घायल हो गए। हालांकि, अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, न्यायिक अधिकारी वर्तमान में उन मतदाताओं के मामलों की जांच कर रहे हैं जिनके नाम 28 फरवरी को प्रकाशित मतदाता सूचियों में ‘‘विचाराधीन’’ के रूप में चिह्नित किए गए थे, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि उन्हें सूची में रखा जाना चाहिए या उनके नाम हटा दिए जाने चाहिए।
अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पहले मांग की कि वे न्यायिक अधिकारियों से मुलाकात करेंगे, लेकिन प्रवेश से इनकार किए जाने पर उन्होंने प्रदर्शन शुरू कर दिया और परिसर का घेराव किया। बचाव अभियान के बाद भी राष्ट्रीय राजमार्ग-12 पर नाकाबंदी जारी रही। स्थिति में तब थोड़ी राहत मिली जब देर रात एक अपर जिलाधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने आश्वासन दिया कि योग्य मतदाताओं के नाम चार दिनों के भीतर मतदाता सूची में शामिल कर लिए जाएंगे। अधिकारी ने बताया कि आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारियों ने नाकाबंदी हटा ली। निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से घटना की रिपोर्ट मांगी है।