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डीए मामले की अगली सुनवाई अब चुनाव बाद

राज्य सरकार ने दाखिल की रिपोर्ट

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

नयी दिल्ली/कोलकाता : डीए के मामले में राज्य सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को रिपोर्ट दाखिल की गई। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस पी के मिश्रा के डिविजन बेंच ने रिपोर्ट पर गौर करने के बाद कर्मचारियों के एडवोकेट को जवाबी एफिडेविट दाखिल करने का आदेश दिया। इसके साथ ही कहा कि अब इस मामले की अगली सुनवाई छह मई को, यानी चुनाव बाद, होगी।

राज्य सरकार की तरफ से पैरवी करते हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि राज्य सरकार ने कर्मचारियों को बकाया डीए के मद में छह हजार करोड़ रुपए का भुगतान किया है। उन्होंने कहा कि पूर्व जस्टिस इंदू मलहोत्रा के नेतृत्व में गठित कमेटी की सिफारिश के मुताबिक भुगतान किया गया है। एडवोकेट सिब्बल ने कहा कि जिन कर्मचारियों का रिकार्ड उपलब्ध है उन्हें ही भुगतान किया गया है। बेंच ने कहा है कि अगर कर्मचारियों को इस रिपोर्ट को लेकर कोई एतराज है तो वे एफिडेविट दाखिल कर सकते हैं। एडवोकेट सिब्बल ने कहा कि कमेटी की अगली गाइड लाइन मिलने के बाद बाकी कर्मचारियों को भी बकाया डीए का भुगतान किया जाएगा। एडवोकेट फिरदौश शमीम ने यह जानकारी देते हुए बताया कि कर्मचारियों की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट विकाश रंजन भट्टाचार्या की दलील थी कि उन्हें कमेटी के समक्ष अपनी बात कहने का मौका नहीं मिला है। इसी वजह से कंटेंप्ट का मामला दायर करना पड़ा है। इसके साथ ही कहा कि सरकार कर्मचारियों के बीच फरक पैदा करने की कोशिश कर रही है। जस्टिस करोल ने कहा कि डीए का भुगतान तो शुरू किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मताबिक बकाया 25 फीसदी डीए का भुगतान तो तत्काल किया जाना था और बाकी 75 फीसीदी 31 मार्च के अंदर किया जाना था। राज्य की तरफ से यह समय 31 दिसंबर तक बढाने की अपील की गई है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जस्टिस मल्होत्रा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनायी है।

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