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डीम्ड यूनिवर्सिटी के विरोध में छात्रों का नियमित शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू

छात्र हितों से समझौता नहीं: अभिभूषण घोष

अंडमान में डीम्ड यूनिवर्सिटी प्रस्ताव पर बढ़ा विरोध

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : प्रस्तावित डीम्ड यूनिवर्सिटी के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच जॉइंट एक्शन फोरम के सदस्य अभिभूषण घोष ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि आज से छात्र दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक नियमित रूप से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। यह प्रदर्शन कक्षाओं के बाद जवाहरलाल नेहरू राजकीय महाविद्यालय के मुख्य द्वार क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है। अभिभूषण घोष ने कहा कि जनरल कॉल-ऑफ को अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में व्यापक समर्थन मिला, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि आम जनता डीम्ड यूनिवर्सिटी की अवधारणा को स्वीकार नहीं कर रही है। उन्होंने सभी नागरिकों, संगठनों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “अंडमान की जनता ने एकजुट होकर केंद्र सरकार और प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाई है और यह संदेश दिया है कि छात्र हितों के साथ समझौता स्वीकार्य नहीं है।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आंदोलन के दौरान कुछ स्तर पर राजनीतिक बयानबाज़ी और भ्रम की स्थिति बनी, जिससे छात्रों के बीच असमंजस पैदा हुआ। घोष ने कहा कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को लेकर कई तरह की गलत धारणाएँ फैलाई जा रही हैं, जबकि नीति में यह कहीं स्पष्ट रूप से नहीं लिखा है कि मौजूदा कॉलेजों की मान्यता समाप्त कर दी जाएगी। उनके अनुसार, नीति का उद्देश्य सक्षम और सुदृढ़ अवसंरचना वाले संस्थानों को स्वायत्तता देने का है, न कि छात्रों के अधिकारों को सीमित करना। फंडिंग के मुद्दे पर बोलते हुए घोष ने कहा कि डीम्ड यूनिवर्सिटी संबंधी गजट अधिसूचना के अनुसार प्रारंभिक पाँच वर्षों तक वित्तीय सहायता भारत सरकार द्वारा दी जाती है, परंतु उसके बाद निजी भागीदारी की संभावना बढ़ जाती है, जिससे फीस और शैक्षणिक संरचना पर नियंत्रण को लेकर आशंकाएँ उत्पन्न होती हैं। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में शुल्क वृद्धि और डिग्री की नियमितता जैसे मुद्दे सामने आ सकते हैं, जो दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण अंडमान के छात्रों के लिए चिंताजनक हो सकता है। अभिभूषण घोष ने केंद्र सरकार और प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि यदि द्वीपसमूह के छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना है तो डीम्ड यूनिवर्सिटी के स्थान पर एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय की स्थापना पर विचार किया जाना चाहिए, जैसा कि लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में किया गया है। उन्होंने कहा कि “अंडमान भौगोलिक रूप से मुख्यभूमि से दूर है, इसलिए यहाँ के छात्रों को अतिरिक्त शैक्षणिक सुरक्षा और अवसर मिलना आवश्यक है।” उन्होंने दोहराया कि आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा तथा छात्र अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए प्रतिदिन निर्धारित समय पर विरोध दर्ज कराते रहेंगे, जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता।


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