चंडीगढ़ : पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं की संख्या तीन हजार के पार पहुंच गयी है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के अनुसार तरनतारन, फिरोजपुर और संगरूर जिलों में सबसे अधिक मामले सामने आये हैं।
PPCB के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 15 सितंबर से छह नवंबर के बीच पराली जलाने की 3,144 घटनाएं दर्ज की गयीं। पांच नवंबर तक यह संख्या 2,787 थी। तरनतारन में पराली जलाने की सबसे अधिक 611 घटनाएं दर्ज की गयीं।
इसके बाद फिरोजपुर में 410, संगरूर में 281, बठिंडा में 262 और अमृतसर में 231 मामले सामने आये। अब तक 1,077 मामलों में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के रूप में कुल 54.55 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से 30.05 लाख रुपये वसूल किये जा चुके हैं।
PPCB ने यह भी बताया गया है कि इस अवधि के दौरान पराली जलाने की घटनाओं के संबंध में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 (लोक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवज्ञा) के तहत 795 प्राथमिकी दर्ज की गयी हैं। राज्य के अधिकारियों ने फसल अवशेष जलाने वाले किसानों के भूमि रिकॉर्ड में 931 लाल प्रविष्टियां भी दर्ज की हैं।
इनमें तरनतारन में 301 और फिरोजपुर में 98 प्रविष्टियां शामिल हैं। लाल प्रविष्टि दर्ज होने के बाद किसान अपनी कृषि भूमि के बदले कर्ज नहीं ले सकते और न ही उसे बेच सकते हैं। पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने को अक्सर दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण बढ़ने का एक प्रमुख कारण माना जाता है।