नयी दिल्ली : दिवाली से पहले से पहले ही पराली का संकट बढ़ता जा रहा है। पंजाब, मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित 6 राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। गत 15 सितंबर से 6 नवंबर 2026 के बीच सात राज्यों पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में अब तक कुल 6266 पराली जलाने की घटनाएं रिकॉर्ड की जा चुकी हैं।
राज्यवार पराली जलाने की घटनाएं
कृषि मंत्रालय की संस्था CREAMS लैब की तरफ से जारी ताजा आकड़ों के अनुसार पराली जलाने की सबसे ज्यादा 357 घटनाएं पंजाब में रिकॉर्ड की गयीं। सैलैटेलाइट रिमोट सेंसिंग की मदद से पराली (धान के अवशेष) जलाने से होने वाली सक्रिय आग की घटनाओं की संख्या को रिकॉर्ड किया गया है। जिससे प्रदूषण भी बढ़ा है।
मध्य प्रदेश 139 घटनाओं के साथ दूसरे और राजस्थान 58 घटनाओं के साथ तीसरे स्थान पर रहे। उत्तर प्रदेश में 23, हरियाणा में 9 और उत्तराखंड में 3 घटनाएं रिकॉर्ड की गयीं। CREAMS लैब के ताजा बुलेटिन के अनुसार सिर्फ 6 नवंबर को ही छह राज्यों में कुल 589 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गयीं। गौरतलब है कि 3 नवंबर को पंजाब में इस सीजन की सबसे ज्यादा 584 पराली जलाने की घटनाएं रिकॉर्ड की गयी थीं।
पिछले साल के मुकाबले इस साल थोड़ी राहत
हालांकि CREAMS लैब के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल के मुकाबले इस साल थोड़ी राहत है। पंजाब में पिछले साल 6 नवंबर तक कुल 3,284 पराली की घटनाएं रिकॉर्ड हुई थीं, जबकि इस साल 3,144 घटनाएं हुई हैं।
यानी 140 घटनाएं कम दर्ज की गयी हैं। दूसरे राज्यों में भी पराली जलने की घटनाओं में कमी देखी जा रही है, लेकिन दिवाली से पहले बढ़ती घटनाएं दिल्ली-NCR की हवा के लिए खतरे की घंटी हैं। क्योंकि पराली की बढ़ती घटनाओं की वजह से हवा का स्तर भी खराब हो रहा है।