कोलकाता: मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच तनातनी जारी है। आयोग ने इस मामले में चार अधिकारियों पर कार्रवाई करने का सख्त निर्देश दिया है और इसके लिए 21 अगस्त तक की समयसीमा तय की है।
हालांकि, राज्य अभी भी आशावादी है कि बातचीत के माध्यम से समाधान निकल आएगा और सभी जटिलताएं सुलझ जाएंगी। आयोग का कहना है कि संवैधानिक अधिकारों के दायरे में रहते हुए राज्य के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करना अनिवार्य है। सूत्रों के अनुसार, अब तक राज्य सरकार ने आरोपित अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस अनुशासनात्मक कदम नहीं उठाया है। इसी कारण पिछले बुधवार को मुख्य सचिव मनोज पंत को दिल्ली तलब किया गया था।
वहां आयोग ने स्पष्ट कर दिया कि समयसीमा के भीतर ही कार्रवाई होनी चाहिए, अन्यथा आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार किसी भी तरह का असंवैधानिक कदम नहीं उठाएगी। फिलहाल इस विषय पर आंतरिक स्तर पर चर्चा जारी है और तय समय के भीतर आवश्यक निर्णय लिया जाएगा। अधिकारी ने यह भी जोड़ा कि राज्य सरकार संवाद और चर्चा के माध्यम से ही समाधान निकालने में विश्वास करती है और उम्मीद है कि जटिलता टल जाएगी। अब यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार आरोपित अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करती है।