कोलकाता : विशेष रूप से सक्षम विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने और उन्हें स्कूल छोड़ने से रोकने के लिए राज्य का स्कूल शिक्षा विभाग विशेष पहल कर रहा है।
सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त सामान्य स्कूलों में उनके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित करने के उद्देश्य से मंगलवार से तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। इसमें एनसीईआरटी, एससीईआरटी और स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन तथा राज्य मंत्री कौशिक चौधरी भी उपस्थित रहे।
वर्तमान में कक्षा आठ तक विशेष रूप से सक्षम विद्यार्थियों के सामान्य स्कूलों में पढ़ने का प्रावधान है। हालांकि, माध्यमिक स्तर से उन्हें विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई विद्यार्थी आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इसके पीछे अभिभावकों की अनिच्छा के साथ-साथ स्कूलों में पर्याप्त सुविधाओं का अभाव भी एक प्रमुख कारण है।
मंत्री कौशिक चौधरी ने कहा कि विशेष रूप से सक्षम विद्यार्थियों का एक बड़ा हिस्सा स्कूल छोड़ रहा है। उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़े रखने के लिए स्कूलों में आवश्यक सुविधाएं विकसित करने, विशेष शिक्षकों की नियुक्ति और विद्यार्थियों के अनुकूल शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। विभाग का लक्ष्य है कि वे केवल आठवीं तक नहीं, बल्कि बारहवीं तक नियमित रूप से पढ़ाई कर सकें।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से सक्षम विद्यार्थियों के प्रति शिक्षकों और समाज की सोच में बदलाव भी जरूरी है। कार्यशाला में उनकी शिक्षा से जुड़ी समस्याओं, स्कूलों को अधिक अनुकूल बनाने के उपायों और स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति रोकने के तरीकों पर चर्चा होगी। साथ ही, अभिभावकों के अनुभव और सुझावों को भी भविष्य की योजना में शामिल किया जा रहा है।