कोलंबो : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि सुरक्षित समुद्री मार्ग, नौवहन की स्वतंत्रता, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान और निर्बाध समुद्री व्यापार को प्रमुख प्राथमिकताएं बनाए रखना चाहिए, क्योंकि ये दक्षिण एशिया की वृद्धि और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण हैं।
सिंह ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके के साथ ‘बेहद लाभकारी’ बैठक के बाद एक सार्वजनिक कार्यक्रम में यह टिप्पणी की। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने दोहराया कि सभ्यतागत साझेदार, करीबी पड़ोसी और समुद्री साझेदार होने के नाते भारत और श्रीलंका क्षेत्र की सुरक्षा, शांति और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।
कोलंबो में ‘हिंद महासागर क्षेत्र में भारत-श्रीलंका समुद्री सहयोग: साझा नियति वाले सभ्यतागत साझेदार’ विषय पर सिंह ने कहा कि भारतीय और श्रीलंकाई बंदरगाह साझा आर्थिक विकास के इंजन बन सकते हैं, जबकि दोनों देशों के समुद्री उद्योग क्षेत्र की भविष्य की समृद्धि के वाहक बन सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता की रक्षा के लिए भारत और श्रीलंका सबसे करीबी साझेदार के रूप में काम करने के लिहाज से अच्छी स्थिति में हैं।’’
सुरक्षित समुद्री मार्ग, नौवहन की स्वतंत्रता, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान, निर्बाध समुद्री व्यापार और वाणिज्य हमारी प्रमुख प्राथमिकताएं बनी रहनी चाहिए।
मंगलवार को तीन दिवसीय यात्रा पर कोलंबो पहुंचे सिंह ने कहा कि नौवहन की स्वतंत्रता और खुले व्यापार मार्गों को सुनिश्चित करना क्षेत्र के विकास और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। वह 38 साल में श्रीलंका की यात्रा करने वाले पहले भारतीय रक्षा मंत्री हैं। उन्होंने कहा, ‘‘...इसलिए, सुरक्षित समुद्री मार्ग, नौवहन की स्वतंत्रता, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान, निर्बाध समुद्री व्यापार और वाणिज्य हमारी प्रमुख प्राथमिकताएं बनी रहनी चाहिए।’’ सिंह ने कहा कि उभरती समुद्री चुनौतियों को गंभीर खतरा बनने से पहले ही उनका समाधान करने के लिए दोनों देशों को मिलकर एक अनुकूल और सुरक्षित समुद्री माहौल तैयार करने की दिशा में काम करना चाहिए।
आज हिंद महासागर केवल एक जलमार्ग नहीं है, बल्कि यह वह मंच है जहां क्षेत्र के आर्थिक और रणनीतिक भविष्य की रूपरेखा तैयार होगी।
उन्होंने कहा कि श्रीलंका हिंद महासागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थान रखता है और यह क्षेत्र व्यस्त व्यापारिक मार्गों से घिरे विशाल महासागर पर नजर रखता है। सिंह ने कहा कि आज हिंद महासागर केवल एक जलमार्ग नहीं है, बल्कि यह वह मंच है जहां क्षेत्र के आर्थिक और रणनीतिक भविष्य की रूपरेखा तैयार होगी। मछुआरों के मुद्दे पर सिंह ने कहा कि दोनों देशों को संबंधित कानूनों और भौगोलिक अधिकार क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए मछली पकड़ने से जुड़े विवादों का पारस्परिक रूप से लाभकारी तरीके से समाधान करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें मछली पकड़ने से जुड़े विवादों से बचने के लिए अपनी व्यवस्थाओं को मजबूत करने, इस मुद्दे को संवेदनशीलता के साथ संभालने के लिए मिलकर काम करना होगा, क्योंकि यह आजीविका से जुड़ा मामला है। साथ ही समुद्री कानूनों का प्रभावी पालन भी सुनिश्चित करना होगा।’’ उन्होंने कहा कि पारंपरिक ढांचे से आगे बढ़कर दोनों देशों को मौजूदा आपसी सहयोग और समानताओं को मजबूत करना चाहिए तथा अधिक करीबी और मजबूत समुद्री साझेदारी के लिए नए प्रतिमान विकसित करने चाहिए।