कोलकाता : विधानसभा में गुरुवार को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से इतर इंसानियत की एक मिसाल ने सबका ध्यान खींचा। पूर्व बर्दवान के भेदिया हाई स्कूल के प्रधान शिक्षक नवकुमार घोष ने 13 वर्षों से बेहद कमजोर दृष्टि से जूझ रहे गरीब आदिवासी छात्र रामकृष्ण टुडू की आंखों में रोशनी लौटाने की पहल की। उनके प्रयास से रामकृष्ण की एक आंख में कॉर्निया प्रत्यारोपण संभव हुआ।
शिक्षक की इस पहल को विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने ‘अभूतपूर्व मानवीय प्रयास’ करार देते हुए सदन में नवकुमार घोष को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि किसी की जिंदगी में वास्तविक बदलाव लाने वाले ऐसे लोगों को पहचानना और सम्मानित करना जरूरी है। स्पीकर ने सभी विधायकों से अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे लोगों की तलाश कर उन्हें सामने लाने और सम्मानित करने की अपील की।
दरअसल, रामकृष्ण के परिवार ने इलाज की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी। उसके पिता जनमजदूर हैं। करीब एक वर्ष पहले नवकुमार घोष ने छात्र के इलाज की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली। उसे अस्पताल ले जाने से लेकर विशेषज्ञों से सलाह, कॉर्निया दाता की तलाश और इलाज की व्यवस्था तक उन्होंने लगातार प्रयास किया। अंततः कोलकाता के एक निजी अस्पताल में रामकृष्ण की आंख का कॉर्निया प्रत्यारोपण हुआ।
सदन में शिक्षक का सम्मान होते ही सत्ता-विपक्ष के विधायक खड़े हो गये और तालियों से उनका अभिनंदन किया। विधानसभा का यह सम्मान एक शिक्षक के उस प्रयास को मिला, जिसने एक बच्चे के लिए दुनिया देखने का रास्ता खोल दिया।