नई दिल्ली: कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने गाजा के हालात को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार इस मुद्दे पर लगातार चुप्पी साधे हुए है और भारत को फलस्तीनी लोगों के समर्थन में स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
एक अंग्रेजी दैनिक में लिखे लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि गाजा और वेस्ट बैंक में हो रही घटनाओं पर भारत को वैश्विक जनमत के अनुरूप प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
सोनिया गांधी ने संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि गाजा में मानवीय स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि हजारों बच्चों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों का घायल होना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि गाजा में बच्चों को निशाना बनाए जाने के आरोप बेहद गंभीर हैं और इस पर दुनिया को ध्यान देना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि आयोग की 94 पन्नों की रिपोर्ट में गाजा में हुई तबाही और वहां की मानवीय स्थिति का विस्तृत विवरण दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि रिपोर्ट में बच्चों की मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था के नुकसान और बुनियादी ढांचे के विनाश का जिक्र है।
सोनिया गांधी ने कहा कि गाजा के स्कूलों और स्वास्थ्य सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसका सबसे ज्यादा असर बच्चों और आम नागरिकों पर पड़ा है।
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने आयोग की रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने कहा कि भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति उपनिवेशवाद विरोधी सोच, संप्रभुता और शांति के सिद्धांतों पर आधारित रही है, लेकिन मौजूदा समय में देश इन मूल्यों से दूर होता नजर आ रहा है।
उन्होंने कहा कि कई देशों ने फलस्तीनी राष्ट्र को मान्यता दी है और कुछ देशों ने इजराइल के साथ अपने संबंधों की समीक्षा की है, लेकिन भारत इस मुद्दे पर चुप बना हुआ है।
सोनिया गांधी ने कहा कि भारत ने फलस्तीन, ईरान और पश्चिम एशिया के कई पुराने मित्रों से दूरी बना ली है। उन्होंने केंद्र सरकार से गाजा और पश्चिमी तट की स्थिति पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि सरकार की चुप्पी को न तो नैतिक और न ही तार्किक आधार पर सही ठहराया जा सकता है।