नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा है कि यदि केंद्र सरकार यह स्पष्ट और लिखित आश्वासन देती है कि NEET पेपर लीक मामले में आंदोलन कर रहे युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी, तो वह अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा आश्वासन नहीं मिला, तो उन्हें अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखनी पड़ेगी।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को लिखे पत्र में वांगचुक ने कहा, "मैं सरकार से विनम्रतापूर्वक यह स्पष्ट आश्वासन चाहता हूं कि आंदोलन में शामिल किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई प्रतिशोधात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।"
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी केवल पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं और उनकी आवाज को दबाने के बजाय सुना जाना चाहिए।
वांगचुक पिछले 25 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उन्हें शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर से पुलिस ने हटाकर गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन उन्होंने अस्पताल में भी अपना अनशन जारी रखा है। यह आंदोलन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर चलाया जा रहा है।
अपने पत्र में वांगचुक ने दोनों केंद्रीय मंत्रियों का अस्पताल में मुलाकात करने के लिए धन्यवाद भी दिया। उन्होंने बताया कि मुलाकात के दौरान मंत्रियों ने आश्वासन दिया कि सरकार पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले NEET अभ्यर्थियों के परिवारों को उचित मुआवजा देने के प्रस्ताव पर विचार करेगी।
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि सरकार संसद में NEET पेपर लीक पर चर्चा कराने और जवाबदेही तय करने के मुद्दे पर भी विचार करेगी। वांगचुक के अनुसार, इस चर्चा में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर भी विचार किए जाने की बात कही गई है।
हालांकि, वांगचुक ने स्पष्ट किया कि जब तक प्रदर्शन में शामिल छात्रों की सुरक्षा और उनके खिलाफ कार्रवाई न होने की गारंटी नहीं मिलती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश के छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए है।