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नेत्रदान मामले में बेटे की गिरफ्तारी का मामला, पुलिस की कार्रवाई पर समाजसेवियों का फूटा गुस्सा

विज्ञान व समाज कर्मियों ने किया कोतवाली थाने का किया घेराव, कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट में भी हुआ विरोध-प्रदर्शन

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता / कृष्णनगर: नदिया जिले के कृष्णनगर में एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने मानवता और कानून के बीच की लकीर को धुंधला कर दिया है। मृत मां की अंतिम इच्छा पूरी करते हुए उनकी आंखें दान करने वाले बेटे आमिर चांद सहित परिवार के पांच सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई के विरोध में बुधवार को विज्ञान मंच के सदस्यों और समाजसेवियों ने कोतवाली थाने के सामने जोरदार प्रदर्शन किया और सभी की बिना शर्त रिहाई की मांग की। इसके साथ ही एपीडीआर संगठन की ओर से भी समाजकर्मी और उनके परिवार की गिरफ्तारी पर तीव्र प्रतिवाद जताते हुए उनको तुरंत रिहा करने की मांग की गयी।

क्या है पूरा मामला?

रविवार को रबेया बीबी नामक महिला की मृत्यु के बाद उनकी इच्छा के अनुसार 'शांतिपुर मरमी' नामक संस्था ने उनकी आंखों की कॉर्निया संग्रह की। संस्था का दावा है कि उनके पास सभी वैध दस्तावेज हैं और परिवार की सहमति से ही यह प्रक्रिया पूरी की गई। हालांकि, सेनपुर इलाके के कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगा दिया कि आंखें 'बेची' गई हैं। इस अफवाह के बाद स्थानीय लोगों ने जमकर हंगामा किया और थाने में लिखित शिकायत दर्ज करा दी।

बिना जांच के गिरफ्तारी पर सवाल

शिकायत मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए परिवार के पांच सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया, जिन्हें अदालत ने 14 दिनों की जेल हिरासत में भेज दिया है। राज्य मानवाधिकार आयोग के उपाध्यक्ष तापस चक्रवर्ती ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, "न्यूनतम जांच किए बिना ही निर्दोष परिवार को जेल में डाल देना समझ से परे है।" प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस के इस रवैये से भविष्य में लोग अंगदान करने से डरेंगे, जिससे दृष्टिहीन और लाचार मरीजों का भारी नुकसान होगा। वहीं, एडिशनल एसपी संभव जैन का कहना है कि कार्रवाई लिखित शिकायत के आधार पर हुई है और मामला अब विचाराधीन है।

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