केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद अब और गंभीर हो गया है। मतदाता सूची सुधार के नाम पर उठ रहे सवालों, BLO की मौतों और आम वोटरों की शिकायतों के बीच राज्य के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO) मनोज अग्रवाल का पर्सनल मोबाइल नंबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। लगातार कॉल और मैसेज से परेशान CEO ने कानूनी सलाह ली है और FIR दर्ज कराने का संकेत दिया है।
वायरल नंबर से बढ़ी CEO की मुश्किल
CEO मनोज अग्रवाल ने कहा कि उनका निजी फोन नंबर सोशल मीडिया पर फैलने के बाद स्थिति बेकाबू हो गई है। उन्हें मजबूरी में फोन साइलेंट करना पड़ा। उनके मुताबिक, जिस तरह लगातार कॉल और मैसेज आ रहे हैं, उससे काम करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने साफ किया कि अब वह इस मामले में FIR दर्ज कराएंगे।
SIR प्रक्रिया पर सियासी टकराव
SIR को लेकर शिकायतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पांचवीं बार चुनाव आयोग को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि SIR की मौजूदा प्रक्रिया बुनियादी तौर पर गलत और गैर-कानूनी है। उन्होंने दावा किया कि कई वोटरों को डॉक्यूमेंट जमा करने के बाद कोई रसीद या एक्नॉलेजमेंट नहीं दी जा रही और बाद में उन्हीं कागजातों को “रिकॉर्ड में नहीं” बताकर नाम हटाए जा रहे हैं।
BLO की मौतों से बढ़ा तनाव
SIR शुरू होने के बाद अब तक सात BLO की मौत का दावा किया जा रहा है। ईस्ट बर्दवान, जलपाईगुड़ी, नदिया, मुर्शिदाबाद, बांकुड़ा और कूचबिहार में BLO की मौत या आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। आरोप है कि अत्यधिक काम के दबाव के चलते ये घटनाएं हुईं। इसे लेकर तृणमूल समर्थित BLO संगठन लगातार CEO ऑफिस के बाहर प्रदर्शन कर रहा है। इस संबंध में सीईओ कार्यालय का कहना है कि डीएम से रिपोर्ट मांगी गई है, लेकिन अभी तक एक भी रिपोर्ट ऐसी नहीं आई जिससे यह साबित हो सके कि एसआईआर के काम के कारण मौत हुई है।
बढ़ता विवाद, बढ़ती चुनौती
SIR को लेकर प्रशासन, राजनीतिक दल, BLO और आम वोटर—सब असंतुष्ट हैं। ऐसे माहौल में CEO का पर्सनल नंबर वायरल होना इस पूरे विवाद की गंभीरता को उजागर करता है।