नयी दिल्ली : तृणमूल कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को निर्वाचन आयोग से मुलाकात करेगा और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण लोगों के ‘मतदान के अधिकार से वंचित’ होने का मुद्दा उठाएगा। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ'ब्रायन ने कहा कि उन्होंने सोमवार को निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर मिलने का समय मांगा था और इसका जवाब मंगलवार को अपराह्न करीब तीन बजे आया। उन्होंने कहा कि ओ'ब्रायन और सागरिका घोष के अलावा साकेत गोखले और मेनका गुरुस्वामी सहित चार सदस्यीय पार्टी प्रतिनिधिमंडल बुधवार सुबह निर्वाचन आयोग से मुलाकात करेगा। उन्होंने कहा कि यदि निर्वाचन आयोग ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया होता तो वे धरने पर बैठने के लिए भी तैयार थे। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को निशाना बनाते हुए ओ'ब्रायन ने कहा, बहुत हो गया आपका अहंकार। हमारी बात सुनिये। हम यहां सिर्फ तृणमूल कांग्रेस के बारे में बोलने नहीं आए हैं, हम यहां इसलिए हैं ताकि आप उन लोगों की आवाज सुनिये जिन्हें आपने मताधिकार से वंचित किया है या जिन्हें आप मताधिकार से वंचित करने की कोशिश कर रहे हैं।’
तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा उपनेता सागरिका घोष ने कहा कि निर्वाचन आयोग धौंस दिखाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन असल में ‘डरा हुआ है।’ उन्होंने कहा, लगभग 27 लाख लोग विवेचनाधीन सूची से बाहर कर दिये गए हैं। पहले चरण की मतदाता सूची फ्रीज कर दी गई है। वास्तविक मतदाताओं को कैसे जोड़ा जाएगा? उन्होंने निर्वाचन आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बाद मतदाता सूची से करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य के अंतिम मतदाता आधार की घोषणा अभी बाकी है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष अक्टूबर के अंत में 7.66 करोड़ मतदाताओं के आधार पर, राज्य में इस समय कुल हटाए गए मतदाताओं का प्रतिशत 11.85 प्रतिशत से अधिक है। एसआईआर प्रक्रिया की शुरुआत से अब तक कुल हटाए गए नामों की अंतिम संख्या 90.83 लाख से थोड़ा अधिक रही।