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SIR सुनवाई में मौतों ने चुनावी चिंता बढ़ाई

लंबी कतारों, स्वास्थ्य संबंधी मामलों से परेशान हुए नागरिक

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने कई जिलों में नागरिकों के लिए भारी असुविधा और तनाव पैदा कर दिया है। मंगलवार को राज्यों के तीन जिलों में SIR सुनवाई के दौरान लोगों की लंबी कतारों, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और राजनीतिक दबाव के बीच कुछ मौतों की खबरें सामने आईं। यह स्थिति न केवल आम लोगों के जीवन को प्रभावित कर रही है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी सवाल खड़े कर रही है।

सुनवाई के दौरान नागरिकों की परेशानियां

श्रीरामपुर की पापिया साहा रॉय ने अपने पति की हाल ही में हुई मृत्यु के बावजूद SIR सुनवाई में भाग लिया। बुजुर्गों और बीमार नागरिकों को भी लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ा। डायमंड हार्बर में अनवर हुसैन खान अपनी शादी के दिन भी सुनवाई में शामिल हुए, वहीं सोनारपुर की 104 साल की बुजुर्ग महिला धक्का-मुक्की के बावजूद हियरिंग सेंटर पहुंचीं।

SIR पैनिक और मौतें

तीन जिलों में दर्ज की गई मौतों में नादिया की अहिबा शेख और कूचबिहार के दिनहाटा में एक व्यक्ति शामिल हैं। मालदह के शरीफुल की मौत भी SIR नोटिस मिलने के बाद हुई, जबकि उनका नाम 2002 की वोटर लिस्ट में पहले से ही सही था।

राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया

तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना साधते हुए SIR की प्रक्रिया को लोगों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बताया। उत्तर बंगाल विकास मंत्री उदयन गुहा ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया।

चुनावी माहौल में चिंता

SIR की यह विवादास्पद प्रक्रिया पश्चिम बंगाल में चुनावी तनाव बढ़ा रही है। राजनीतिक दलों और आम जनता दोनों के बीच इसे लेकर असंतोष फैल रहा है, जिससे आगामी चुनावों पर गंभीर प्रभाव पड़ने की संभावना है।

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