निधि, सन्मार्ग संवाददाता
बारासात: अक्सर सरकारी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को नीरस और बोझिल समझा जाता है, लेकिन पश्चिम बंगाल में चल रहे एसआईआर (Socio-Economic and Caste Census Data) संग्रहण अभियान के दौरान एक ऐसी मानवीय और आश्चर्यजनक घटना सामने आई है, जिसने सभी को भावुक कर दिया है। बारासात के दत्तोपुकुर की निवासी कल्याणी अधिकारी को एसआईआर से जुड़े अपने दस्तावेजों की तलाश करते हुए अपनी 20 साल से लापता बेटी का पता चल गया।
दत्तोपुकुर के कोटरा इलाके की रहने वाली कल्याणी अधिकारी ने लगभग दो दशक पहले तक अपनी बेटी और दामाद के साथ दमदम में किराए के मकान में जीवन यापन किया था। वे अपनी बेटी के ससुराल के पास ही रहते थे। हालांकि, समय के साथ आर्थिक समस्याओं ने उन्हें घेर लिया, और मजबूरन उन्हें दमदम छोड़कर दत्तोपुकुर स्थित अपने मायके लौटना पड़ा। दुर्भाग्यवश, इसी वापसी के दौरान उनकी बेटी से उनका संपर्क पूरी तरह से टूट गया।
अगले बीस सालों तक कल्याणी अधिकारी ने एक असहाय माँ की तरह अपनी बेटी को खोजने की हर संभव कोशिश की। उन्होंने दमदम सहित राज्य के कई इलाकों में बेटी की तलाश की, लेकिन कोई खबर नहीं मिली। इस दौरान आई कोरोना महामारी ने भी इस माँ की पीड़ा को और बढ़ा दिया, क्योंकि वह अपनी बेटी की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंतित रहती थीं। मंदिर से लेकर प्रशासन के दरवाज़ों तक दस्तक देने के बाद, जब कहीं कोई सहारा नहीं मिला, तो उन्होंने दत्तोपुकुर के नक्शा काली मंदिर में आश्रय लिया।
नियति ने इस माँ के लिए कुछ और ही तय कर रखा था। हाल ही में राज्य भर में एसआईआर का कार्य शुरू हुआ। इस कार्य के लिए अपने पुराने और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को ढूंढने के क्रम में, कल्याणी देवी को एक बार फिर दमदम जाना पड़ा, जहाँ उनका पुराना ठिकाना था।
और यहीं पर वह अविश्वसनीय संयोग हुआ जिसका इंतज़ार उन्हें दो दशकों से था। दमदम की सड़कों पर अचानक उनकी मुलाक़ात अपने दामाद से हो गई। अपने दामाद को देखकर कल्याणी अधिकारी की आँखें भर आईं। दामाद भी उन्हें देखते ही पहचान गए और बिना देर किए उन्हें सीधे अपने घर ले गए। इस तरह, 20 साल के लंबे इंतज़ार के बाद माँ और बेटी आमने-सामने थीं। यह पुनर्मिलन इतना भावुक था कि दोनों परिवारों में खुशी और आँसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
मुलाकात के दौरान कल्याणी देवी को एक और सुखद आश्चर्य हुआ। उनकी बेटी और दामाद ने कल्याणी देवी के पुराने वोटर कार्ड, राशन कार्ड समेत सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों को बहुत संभाल कर रखा था। ये वही दस्तावेज थे जिनकी तलाश में कल्याणी देवी दमदम आई थीं। दस्तावेजों को वापस पाकर और अपनी बेटी से मिलकर, कल्याणी देवी ने तत्काल SIR के लिए आवश्यक फार्म भरा।
खुशी से अभिभूत कल्याणी देवी ने इस पुनर्मिलन का अप्रत्यक्ष कारण बने चुनाव आयोग और प्रशासनिक प्रक्रिया को धन्यवाद दिया। यह कहानी दर्शाती है कि कैसे कभी-कभी प्रशासनिक जटिलताएं भी मानवीय रिश्तों को जोड़ने का माध्यम बन जाती हैं।