डीम्ड विश्वविद्यालय परिवर्तन पर छात्रों की चिंता
स्थानीय महाविद्यालय ग्रामीण छात्रों के लिए महत्वपूर्ण
सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसआईओ) अंडमान एवं निकोबार ने जवाहरलाल नेहरू राजकीय महाविद्यालय, अंडमान लॉ कॉलेज, टैगोर कॉलेज, एएनआईआईएमएस तथा अन्य संस्थानों के उन छात्रों के प्रति अपनी दृढ़ एकजुटता व्यक्त की है जो डीम्ड विश्वविद्यालय संरचना में अचानक परिवर्तन को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहे हैं। अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियां विशिष्ट हैं, जहां बड़ी संख्या में छात्र ग्रामीण और आर्थिक रूप से साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं। मुख्य भूमि पर उच्च शिक्षा प्राप्त करना उनके लिए यात्रा, आवास और जीवनयापन की ऊंची लागत के कारण आर्थिक रूप से कठिन है। ऐसे छात्रों के लिए स्थानीय सरकारी महाविद्यालय केवल शिक्षण संस्थान नहीं बल्कि उच्च शिक्षा का एकमात्र सुलभ माध्यम हैं। किसी भी ऐसी नीतिगत परिवर्तन से जो वित्तीय बोझ बढ़ाए, ग्रामीण एवं वंचित छात्रों के शिक्षा से बाहर होने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। एसआईओ अंडमान का मानना है कि उच्च शिक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार का परिवर्तन छात्र-केंद्रित, पारदर्शी और लोकतांत्रिक होना चाहिए। सैकड़ों छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को प्रभावित करने वाले निर्णय बिना उचित परामर्श, स्पष्ट संवाद और पर्याप्त सुरक्षा उपायों के लागू नहीं किए जाने चाहिए। डिग्री मान्यता, शैक्षणिक निरंतरता और संस्थागत विश्वसनीयता को लेकर छात्रों की चिंता वास्तविक है और तत्काल समाधान की मांग करती है।
एसआईओ अंडमान ने संबंधित प्राधिकरणों से सार्थक संवाद स्थापित करने, वर्तमान छात्रों के हितों की लिखित सुरक्षा देने, प्रशासनिक बदलावों से किसी भी छात्र को नुकसान न होने देने, द्वीपों की भौगोलिक एवं आर्थिक चुनौतियों को ध्यान में रखने तथा उच्च शिक्षा में सुलभता, वहनीयता और गुणवत्ता के सिद्धांतों को बनाए रखने का आग्रह किया है। संगठन ने शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण आंदोलन के लिए छात्रों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी एकता शिक्षा के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती है और न्यायसंगत समाधान मिलने तक एसआईओ उनके साथ खड़ा रहेगा।