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शटल बसें ऑटो रूट्स पर उतरीं, यात्रियों को मिली भरोसेमंद सवारी

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : महानगर में शटल बस सेवाएं अब शहर के व्यस्त ऑटो रूट्स पर चलकर यात्रियों को बेहतर सुविधा देने की कोशिश कर रही हैं। ये बसें ऐप-आधारित और निजी तौर पर चलाई जा रही हैं, और खासतौर पर उन इलाकों को कवर कर रही हैं जहां आखिरी मील कनेक्टिविटी की समस्या बढ़ गई है। पिछले दो हफ्तों में, हावड़ा और बेहला-सर्सुना से आने वाली कई शटल बसें पहले की तरह पार्क स्ट्रीट–विक्टोरिया मेमोरियल मार्ग लेने के बजाय पार्क सर्कस, गरियाहाट और कस्बा कनेक्टर जैसे अधिक भीड़भाड़ वाले रूट्स का इस्तेमाल कर रही हैं। वहीं जोका रूट की बसें टॉलीगंज मेट्रो–हरिदेवपुर मार्ग से जा रही हैं। हालांकि ये नए रास्ते पारंपरिक मार्गों की तुलना में 30–45 मिनट ज्यादा समय लेते हैं, फिर भी ऑपरेटरों का कहना है कि इससे उन्हें ज्यादा यात्री मिल रहे हैं।

ऑटो सेवाएं प्रभावित होने के कारण यात्रियों की अच्छी मांग

बढ़ते ईंधन खर्च और फ्लाईओवर (मां और एजेसी बोस रोड) पर प्रतिबंध के कारण उनकी लागत बढ़ गई है, जिससे कम समय में ज्यादा ट्रिप करना मुश्किल हो गया है। ट्रैफिक विशेषज्ञों के अनुसार, पार्क स्ट्रीट वाला मार्ग भले ही छोटा है, लेकिन वहां यात्रियों की संख्या कम है। इसके विपरीत, गरियाहाट और कस्बा जैसे इलाकों में ऑटो सेवाएं प्रभावित होने के कारण यात्रियों की अच्छी मांग मिल रही है। हालांकि, इन बसों के ऑटो रूट्स पर आने से ऑटो यूनियनों और शटल ऑपरेटरों के बीच विवाद की आशंका भी बढ़ गई है। कोलकाता ट्रैफिक पुलिस इस स्थिति पर नजर रखे हुए है, क्योंकि पहले से ही भीड़भाड़ वाले रास्तों पर बड़ी गाड़ियों के आने से ट्रैफिक जाम और बढ़ सकता है। आईटी सेक्टर फाइव और न्यू टाउन जाने वाले हजारों यात्रियों के लिए यात्रा समय जरूर बढ़ा है, लेकिन उन्हें अब बैठने की गारंटी और अधिक भरोसेमंद सफर मिल रहा है। कई यात्रियों का कहना है कि लंबा समय लगने के बावजूद यह विकल्प ज्यादा सुविधाजनक है।

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