केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद से उनके शांतिपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रमों और सभाओं को बार-बार रोका गया। इसके खिलाफ उन्हें कुल 104 बार कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अधिकारी ने यह घटना राज्य में लोकतांत्रिक अधिकारों के उल्लंघन का उदाहरण बताते हुए सरकार पर “तानाशाही” के आरोप लगाए।
अधिकारी ने सोशल मीडिया पोस्ट के साथ एक सूची साझा की। इस सूची में उन सभी कार्यक्रमों और सभाओं का विवरण था जिन्हें तृणमूल सरकार और पुलिस प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि यह सूची इस बात का सबूत है कि राज्य में विपक्ष की आवाज़ को दबाने का प्रयास लगातार किया गया।
शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि उनके कार्यक्रमों और सभाओं की अनुमति बिना किसी ठोस कारण के नहीं दी गई। अधिकारी ने कहा कि इस तरह के प्रतिबंध केवल विपक्ष की आवाज़ को दबाने और लोकतांत्रिक अधिकारों में हस्तक्षेप करने के लिए लगाए गए थे।
अधिकारी ने बताया कि हर बार जब उनकी सभाओं या कार्यक्रमों पर रोक लगी, उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया। हर मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने लोकतंत्र के पक्ष में उन्हें कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी। इससे साबित होता है कि अधिकारी ने कानूनी रास्ते अपनाकर अपने अधिकारों की रक्षा की।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि आने वाले समय में भी वे अपने अधिकारों के लिए अदालत जाते रहेंगे। 2026 विधानसभा चुनाव से पहले भी वे कानूनी मार्ग अपनाते रहेंगे और अपने राजनीतिक कार्यक्रम जारी रखेंगे। अधिकारी ने साफ कहा कि उन्हें रोकना संभव नहीं है और उनका लोकतांत्रिक अधिकार बनाए रखना प्राथमिकता है।
अधिकारी का दावा है कि यह लड़ाई सिर्फ़ उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष और लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता के सामने उनकी राजनीतिक आवाज़ को दबाना असंभव है और कानून उनके अधिकारों की रक्षा करेगा।