पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा कर दी गई है। भाजपा के विधायक दल की बैठक में शुभेंदु अधिकारी को नेता चुन लिया गया। विधायक दल का नेता चुनते ही उनका मुख्यमंत्री बनना तय हो गया है। शुभेंदु पहले ही सीएम की दौड़ में सबसे आगे चल रहे थे, क्योंकि वह एकमात्र ऐसे भाजपा नेता थे, जिन्होंने पिछले चुनाव में भी और इस चुनाव में भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चुनाव में हराया था।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में भाजपा विधायक दल की बैठक हुई। अमित शाह को केंद्रीय संगठन की ओर से भाजपा विधायक दल की बैठक का पर्यवेक्षक बनाया गया था। बैठक में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने शुभेंदु के नाम का प्रस्ताव रखा। इसके बाद उनके सीएम बनने पर मुहर लग गई। शुभेंदु कल सुबह यानी शनिवार 9 मई को 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
शुभेंदु के विधायक दल का नेता चुने जाने की घोषणा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने की। भाजपा ने शाह को पर्यवेक्षक बनाकर बंगाल भेजा था। शाह की अध्यक्षता में ही भाजपा विधायक दल की बैठक हुई। बैठक के बाद शाह ने कहा कि आज भाजपा बंगाल विधानसभा के सदस्यों की बैठक यहां बुलाई गई, उस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुझे और मोहन चरण माझी को केंद्र की ओर की तरफ से पर्यवेक्षक के रूप में भेजा। कुछ दिन पहले चुनाव की प्रक्रिया पूरी हुई है। लगभग 8 प्रस्ताव और समर्थन प्राप्त हुए हैं, सभी प्रस्ताव और समर्थन एक ही नाम के लिए मिले हैं, दूसरे नाम के लिए भी सबको समय दिया गया है। दूसरा नाम नहीं आया है इसलिए मैं केंद्रीय पर्यवेक्षेक के रूप में शुभेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल विधानमंडल के नेता के रूप में निर्वाचित करने की घोषणा करता हूं।
बंगाल में भाजपा की जीत में शुभेंदु अधिकारी की महत्वपूर्ण भूमिका एवं योगदान है। वह पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के समय विधानसभा में विपक्ष के नेता थे। वह लगातार ममता सरकार के खिलाफ लड़े और भाजपा को मजबूत किया।
शाह ने नए विधायकों को संबोधित करते हुए कहा- इतना बड़ा विधायक दल देखकर मन, आत्मा, शरीर, सबके अंदर खुशी की लहर उठती है। मैं दोनों हाथ जोड़कर जिम्मेदारी के साथ बंगाल की जनता को कोटि-कोटि धन्यवाद देना चाहता हूं।
जिस तरह का मौहाल CPIM के समय से यहां बनाया जाता था, ममता ने इसे और गहरे भय में बदला। वहां मत की अभिव्यक्ति लगभग असंभव थी। सैंकड़ो उदाहरण हिंसा के, क्रूरता के थे। उसके बीच भाजपा पर भरोसा करके बंगाल की जनता को प्रचंड विजयी देने के लिए धन्यवाद।
शुभेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर, 1970 को पूर्वी मेदिनीपुर के कांथी में एक समृद्ध राजनीतिक परिवार में हुआ था। उनके पिता शिशिर अधिकारी बंगाल की राजनीति में सम्मानित और कद्दावर नाम हैं। मेदिनीपुर के पूरे क्षेत्र पर दशकों से अधिकारी परिवार का प्रभाव रहा है। शुभेंदु ने राजनीति की शुरुआती बारीकियां उन्हीं से सीखीं। उन्होंने अपना राजनीतिक करियर 1989 में कांग्रेस की छात्र परिषद से शुरू किया। उस दौर में पूरे बंगाल में वामपंथी छात्र संगठनों का एकछत्र दबदबा था, ऐसे में एक विपक्षी छात्र नेता के रूप में उन्हें पहचान बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। वर्ष 1995 में कांथी नगर पालिका में पार्षद के रूप में चुनकर उन्होंने अपने चुनावी सफर की औपचारिक शुरुआत की।
शुभेंदु अधिकारी ने अपनी राजनीतिक ताकत का नमूना मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लगातार दो बार हराकर दिखाया। पहली बार नंदीग्राम से ममता को हराया और दूसरी बार उनके घर में यानी भवानीपुर सीट से ही ममता को हराकर शुभेंदु ने इतिहास रच दिया। शुभेंदु ने ममता बनर्जी के साथ ही TMC की नींव रखी। बाद में ममता की नीतियों व ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी से मतभेदों के चलते उन्होंने तृणमूल से नाता तोड़ लिया था और भाजपा में शामिल हो गए थे। शुभेंदु लगातार दो चुनावों में ममता बनर्जी के सामने खड़े हुए। उन्होंने 2021 के विधानसभा में ममता बनर्जी को नंदीग्राम से चुनाव हराया था। वहीं इस बार वो फिर ममता बनर्जी के सामने भवानीपुर से चुनावी मैदान में उतरे. उन्होंने फिर ममता बनर्जी को चुनाव हराया।