नई दिल्लीः कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर हमला तेज करते हुए रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कई सवाल किए और किसानों के साथ विश्वासघात होने का आरोप लगाया। राहुल ने सरकार पर इस समझौते के जरिये “आत्मसमर्पण” करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह मुद्दा देश के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या भारत किसी दूसरे देश को अपने कृषि क्षेत्र पर दीर्घकालिक नियंत्रण हासिल करने की अनुमति दे रहा है।
वहीं इधर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी पर अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ भारत के व्यापार समझौतों को लेकर किसानों को गुमराह करने और झूठ फैलाने का आरोप लगाया। शाह ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने देश के कृषि और दुग्ध उत्पादन क्षेत्रों की पूरी तरह से सुरक्षा की है। शाह ने व्यापार समझौतों से भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचने के विपक्षी दल के आरोपों को ‘‘हास्यास्पद’’ बताया।
राहुल का एक्स पर विस्तृत पोस्ट
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने आज रविवार को ‘एक्स’ पर लिखा, “अमेरिका से व्यापार समझौते के नाम पर हम भारत के किसानों के साथ विश्वासघात होते हुए देख रहे हैं।” उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि ड्राइड डिस्टिल्ड ग्रेन (डीडीजी) के आयात का क्या मतलब है? राहुल ने कहा, “क्या इसका मतलब यह है कि भारतीय मवेशियों को जीएम (अनुवांशिक रूप से परिवर्तित) अमेरिकी मक्का से बने डिस्टिल्ड ग्रेन खिलाए जाएंगे? क्या इससे हमारे दुग्ध उत्पाद प्रभावी रूप से अमेरिकी कृषि उद्योग पर निर्भर नहीं हो जाएंगे?”
उन्होंने सवाल किया अगर भारत जीएम सोया तेल के आयात की अनुमति देता है, तो मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और देशभर के हमारे सोया किसानों का क्या होगा। नेता प्रतिपक्ष ने पूछा, “वे कीमतों में गिरावट का एक और झटका कैसे झेल पाएंगे?”
सरकार किसानों को सफाई दे
राहुल ने कहा, “जब आप अतिरिक्त उत्पाद कहते हैं, तो उसमें क्या-क्या शामिल है? क्या यह समय के साथ दाल और अन्य फसलों को अमेरिकी आयात के लिए खोले जाने के दबाव का संकेत है?” उन्होंने सवाल किया, “गैर-व्यापार बाधाएं हटाने का क्या मतलब है? क्या भविष्य में भारत पर जीएम फसलों पर अपने रुख को ढीला करने, खरीद को कमजोर करने या एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और बोनस को कम करने का दबाव डाला जाएगा?” राहुल ने चिंता जताते हुए कहा कि एक बार यह दरवाजा खुल गया, तो हर साल इसे और ज्यादा खोले जाने से कैसे रोका जाएगा?
कांग्रेस नेता ने कहा कि क्या इसकी रोकथाम होगी, या हर बार सौदे में धीरे-धीरे और भी फसलों को मेज पर रख दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों को इस संबंध में सफाई तो मिलनी चाहिए।
अमित शाह ने किया पलटवार
अमित शाह ने राहुल के पोस्ट के जवाब में पलटवार करते हुए एक सभा में कहा, ‘‘जब कांग्रेस के शहजादा राहुल गांधी संसद में खड़े होकर किसानों की सुरक्षा की बात करते हैं तो मुझे हंसी आती है। कांग्रेस का देश को गुमराह करने का एक लंबा इतिहास रहा है और अब वे व्यापार समझौतों को लेकर झूठ फैला रहे हैं।’’ शाह भारत की पहली केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) आधारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की शुरुआत करने के बाद गांधीनगर में एक सभा को संबोधित कर रहे थे।
मोदी सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा की
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार ने हर समझौते में किसानों के हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस देश के किसानों, पशुपालकों और मछुआरों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और अमेरिका के साथ हुए हर व्यापार समझौते में नरेन्द्र मोदी ने आपके हितों की पूरी तरह सुरक्षा की है। चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।’’ कांग्रेस की इस आलोचना का उल्लेख करते हुए कि ये समझौते भारत के डेयरी क्षेत्र को नष्ट कर देंगे, शाह ने कहा कि राहुल गांधी झूठ फैला रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने इन समझौतों पर हस्ताक्षर करके भारत के डेयरी क्षेत्र को खत्म कर दिया है।
राहुल गांधी को सार्वजनिक बहस की चुनौती
केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा, ‘‘हमने डेयरी क्षेत्र का विस्तार किया है, इसे कमजोर नहीं किया। सभी समझौतों में डेयरी (क्षेत्र) को पूर्ण संरक्षण दिया गया है।” शाह ने गांधी को इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से बहस करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा, ‘‘राहुल गांधी जी, कोई भी मंच चुन लीजिए। यहां तक कि भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष भी आकर आपसे इस बात पर बहस कर सकते हैं कि किसने किसानों को नुकसान पहुंचाया है और किसने उनके कल्याण के लिए काम किया है।’’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने हाल ही में भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिये जाने की घोषणा की। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने पहले कहा था कि पिछले महीने भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए बातचीत पूरी की, जिससे दोनों पक्षों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक संबंध मजबूत होंगे।