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एसएफआई ने अंडमान कॉलेज अलगाव फैसले पुनर्विचार मांगा

द्वीपों के कॉलेजों के भविष्य पर गंभीर प्रभावसंगठन ने संसद अधिनियम से स्थापना का किया जिक्र

डीम्ड विश्वविद्यालय से संबद्धता एकतरफा निर्णय बताया

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) अंडमान एवं निकोबार राज्य आयोजन समिति ने भारत सरकार तथा अंडमान एवं निकोबार प्रशासन से द्वीप समूह के कॉलेजों को पांडिचेरी विश्वविद्यालय से अलग करने के निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। संगठन का कहना है कि यह कदम क्षेत्र में उच्च शिक्षा के भविष्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। इस आशय का एक प्रस्ताव आज श्री विजयपुरम (पोर्ट ब्लेयर) में आयोजित एसएफआई की बैठक में पारित किया गया। संगठन ने गहरी चिंता और पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि एसएफआई तथा उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्रों की ओर से पांडिचेरी विश्वविद्यालय से सभी सात कॉलेजों की निरंतर संबद्धता बनाए रखने की मांगों की लगातार उपेक्षा और अस्वीकृति की गई है। प्रस्ताव रखते हुए एसएफआई अंडमान एवं निकोबार राज्य आयोजन समिति के संयोजक अब्दुल वारिश ने कहा कि पांडिचेरी विश्वविद्यालय की स्थापना 1985 में संसद के अधिनियम के माध्यम से हुई थी और द्वीपों के कॉलेज शैक्षणिक सत्र 1988–89 से इस विश्वविद्यालय से संबद्ध रहे हैं। उन्होंने कहा कि पांडिचेरी विश्वविद्यालय एक केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के नाते देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में से एक है और इसके प्रमाणपत्रों को पूरे देश में व्यापक मान्यता प्राप्त है। बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि एक डीम्ड विश्वविद्यालय — नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंस्टीट्यूट ऑफ हायर लर्निंग — की स्थापना के बाद भारत सरकार ने 8 मार्च 2024 की अधिसूचना के माध्यम से सभी सात कॉलेजों को नवगठित संस्थान से संबद्ध कर दिया। एसएफआई ने आरोप लगाया कि पांडिचेरी विश्वविद्यालय से संबद्धता हटाने और डीम्ड विश्वविद्यालय से जोड़ने का निर्णय बिना पर्याप्त परामर्श के एकतरफा लिया गया। प्रतिभागियों ने चिंता व्यक्त की कि हजारों छात्रों, जिनमें मेडिकल छात्र भी शामिल हैं, की परीक्षा और अन्य शैक्षणिक जिम्मेदारियां ऐसे डीम्ड विश्वविद्यालय को सौंप दी गई हैं, जिसके पास कथित रूप से पर्याप्त बुनियादी ढांचा और शैक्षणिक संसाधन नहीं हैं। संगठन ने यह भी कहा कि यह डीम्ड विश्वविद्यालय सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1960 के तहत पंजीकृत एक सोसाइटी के अंतर्गत गठित है और इसे मुख्य भूमि के राज्य अथवा केंद्रीय विश्वविद्यालयों जैसी वैधानिक मजबूती प्राप्त नहीं है। एसएफआई बैठक में यह भी बताया गया कि डीम्ड विश्वविद्यालय वर्तमान में जेएनआरएम परिसर के एक कमरे के कार्यालय से संचालित हो रहा है और इसे एक अधिकारी ऑन स्पेशल ड्यूटी द्वारा प्रबंधित किया जा रहा है। संगठन के अनुसार, ऐसे नवस्थापित संस्थान से सभी सात कॉलेजों को जोड़ना द्वीपों में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। साथ ही फीस में क्रमिक वृद्धि की संभावना को लेकर भी चिंता जताई गई, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है तथा उच्च शिक्षा तक उनकी पहुंच सीमित हो सकती है।

संगठन ने यह भी कहा कि द्वीपों के कई कॉलेज पहले से ही चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जिनमें प्राचार्यों के पद रिक्त होना और नियमित शिक्षकों की कमी शामिल है, जबकि अधिकांश शैक्षणिक कार्य अतिथि, एडहॉक तथा संविदा शिक्षकों के माध्यम से संचालित हो रहा है। एसएफआई ने कहा कि मौजूदा संस्थानों को मजबूत करने के बजाय उन्हें अलग करना छात्रों के हितों के विपरीत है और इसी मुद्दे पर आने वाले दिनों में आंदोलन करने का निर्णय लिया गया है।

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