कोलकाता : नंदीग्राम उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस की सांगठनिक कमजोरी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। पार्टी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने कहा है कि नंदीग्राम में तृणमूल की खराब स्थिति के लिए केवल स्थानीय नेताओं को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। उन्होंने इसके लिए कोलकाता में बैठे पार्टी नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाया है।
उनका कहना है कि नंदीग्राम में संगठन को मजबूत करने के लिए जिस स्तर की सक्रियता और राजनीतिक रणनीति की जरूरत थी, वह दिखाई नहीं दी। कोलकाता के नेताओं के फैसलों और हस्तक्षेप का भी स्थानीय संगठन पर असर पड़ा। उपचुनाव से पहले आया यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि नंदीग्राम तृणमूल के लिए पहले से ही बेहद संवेदनशील राजनीतिक क्षेत्र रहा है।
2021 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा के शुभेंदु अधिकारी से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद भी यह सीट दोनों दलों के बीच राजनीतिक टकराव का प्रमुख केंद्र बनी रही है।
अब उपचुनाव की तैयारी के बीच संगठन की कमजोरियों पर सार्वजनिक चर्चा ने तृणमूल के भीतर जवाबदेही और नेतृत्व की भूमिका को लेकर नये सवाल खड़े कर दिये हैं। खासकर कोलकाता के नेताओं और स्थानीय संगठन की भूमिका को लेकर उठी बहस पार्टी के लिए नई चुनौती बन सकती है।