निधि, सन्मार्ग संवाददाता
बनगांव : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के गहन संशोधन प्रक्रिया (SIR) के बीच, बनगांव के बागदा स्थित शिंगी गांव से एक अत्यंत चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पड़ोस में रहने वाले तीन भाइयों पर अपने बुजुर्ग पड़ोसी दंपति को फर्जी तरीके से अपने माता-पिता के रूप में दर्शाते हुए एन्यूमरेशन फॉर्म भरने का गंभीर आरोप लगा है।
आरोपी भाइयों की पहचान हिरण्मय विश्वास, रंजन विश्वास और प्रशांत विश्वास के रूप में हुई है। इन पर आरोप है कि इन्होंने बुजुर्ग पड़ोसी हर्षित विश्वास और उनकी पत्नी शुभासिनी विश्वास के ईपीआईसी (EPIC) नंबर (मतदाता पहचान पत्र संख्या) का उपयोग करते हुए SIR एन्यूमरेशन फॉर्म भर दिया।
इस सनसनीखेज घटना के सामने आते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। पीड़ित बुजुर्ग हर्षित विश्वास ने इस घटना पर गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया, "मुझे और मेरी पत्नी शुभासिनी विश्वास को हमारे पड़ोसी भाइयों ने अपने माता-पिता के रूप में दिखाकर हमारे नाम पर फॉर्म भर दिए हैं।" हर्षित विश्वास ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें इस बड़ी गड़बड़ी का पता कुछ दिन पहले ही चला।
इस धोखाधड़ी का पता चलते ही, हर्षित विश्वास ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने बागदा बीडीओ (BDO) कार्यालय जाकर इस संबंध में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है और संबंधित फॉर्म को तत्काल रद्द करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्थानीय पंचायत में भी इस गंभीर मामले की शिकायत दी है।
बुजुर्ग हर्षित विश्वास इस घटना से बेहद परेशान और चिंतित हैं। उन्होंने कहा, "यह एक बहुत बड़ी गड़बड़ी है। इसका भविष्य में क्या असर होगा, खासकर संपत्ति या कानूनी मामलों पर, यही सोचकर मेरी रातों की नींद उड़ गई है।" उनका डर पूरी तरह से जायज है, क्योंकि मतदाता सूची में गलत जानकारी दर्ज होने से आगे चलकर कानूनी और उत्तराधिकार संबंधी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
स्थानीय प्रशासन ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है
शिकायत मिलने के बाद, स्थानीय प्रशासन ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि तीनों भाइयों ने अपने पड़ोसी बुजुर्ग दंपति के EPIC नंबर का इस्तेमाल करते हुए ऐसा क्यों किया और इसके पीछे उनका वास्तविक उद्देश्य क्या था।
हेलेंचा ग्राम पंचायत के उपप्रधान स्वपन हालदार ने भी इस घटना पर आश्चर्य व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, "मैं तीनों भाइयों को 90 के दशक से जानता हूं। यह कैसे और किस मंशा से हुआ, इसकी जांच प्रशासन ही कर सकता है।" उनका मानना है कि बुजुर्ग दंपति द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष और पूरी तरह से जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। पुलिस और प्रशासन इस बात की जांच कर रहे हैं कि यह कृत्य अनजाने में हुई गलती है या फिर किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा है।