नयी दिल्ली : भारत में बुजुर्गों की बढ़ती संख्या अब भविष्य की बात नहीं रह गयी है, बल्कि यह बदलाव हमारे सामने हो रहा है। आज 60 वर्ष से अधिक आयु के भारतीयों की संख्या 16.6 करोड़ से अधिक है, जो 2050 तक दोगुनी होने का अनुमान है। ऐसे में सरकार बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य देखभाल, आवास, देखभाल सेवाओं और अन्य सहायता सुविधाओं का एक व्यापक तंत्र तैयार करने पर काम कर रही है।
जीवन स्तर में सुधार से बढ़ रही बुजुर्गों की आबादी
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव सुधांशु पंत ने कहा कि आज देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा वरिष्ठ नागरिकों का है और उनकी संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अगले 20-22 वर्ष में यह संख्या दोगुनी होने की संभावना है। पंत ने कहा कि चिकित्सा सुविधाओं और जीवन स्तर में सुधार के कारण जीवन प्रत्याशा में काफी वृद्धि हुई है और यह हर साल बढ़ रही है। ऐसे में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी की अलग-अलग जरूरतों को पूरा करना जरूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को हर साल पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
केंद्र 800 देखभाल गृह संचालित कर रहा
पंत ने कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय देशभर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए करीब 800 देखभाल गृह संचालित कर रहा है और ऐसे केंद्र संचालित करने के लिए राज्य सरकारों को भी सहायता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि नीति में ‘डे केयर होम’ संचालित करने के प्रावधान को शामिल करने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बड़े शहरों में बुजुर्गों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित देखभाल करने वालों की जरूरत बढ़ रही है। इसी उद्देश्य से मंत्रालय ने ‘शतायु डैशबोर्ड’ ऐप शुरू किया है, जो देखभाल की जरूरत रखने वाले बुजुर्गों और सेवा देने वाले देखभाल करने वालों के बीच संपर्क स्थापित करने में मदद करेगा।
आवास सुविधा के लिए 7.7 अरब अमेरिकी डॉलर की जरूरत
एसोसिएशन ऑफ सीनियर लिविंग इंडिया (ASLI)-JLL की रिपोर्ट ‘भारत की सिल्वर इकोनॉमी: सीमित क्षेत्र से जरूरी क्षेत्र तक’ के अनुसार नीतिगत समर्थन मिलने पर भारत के वरिष्ठ नागरिकों की आवास सुविधाओं से संबंधित बाजार वर्ष 2030 तक 10.1 अरब अमेरिकी डॉलर का हो सकता है। इसके लिए करीब 7.7 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की जरूरत होगी।