सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : हिंदरलैंड सीमेन यूनियन (सीटू), अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह ने भारत सरकार के गृह सचिव, नई दिल्ली से अनुरोध किया है कि अंडमान एवं निकोबार प्रशासन द्वारा भारत सरकार को भेजे गए प्रस्ताव को शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाए, जिसमें शिपिंग विभाग के अंतर्गत अंतर-द्वीप और तटीय क्षेत्रों में कार्यरत क्रू सदस्यों के वेतन संशोधन को लागू करने की मांग की गई है। हाल ही में भेजे गए पत्र में यूनियन के अध्यक्ष डी. अय्यप्पन ने उल्लेख किया कि प्रशासन के स्वामित्व वाले पोतों के क्रू सदस्यों का वेतन संशोधन वर्ष 2012 से लंबित है, क्योंकि प्रशासन समय पर यूनियन के साथ वेतन समझौता संपन्न करने में विफल रहा। अय्यप्पन ने गृह सचिव को बताया कि अंतर-द्वीप क्षेत्र के पोतों के क्रू सदस्यों का वेतन संशोधन अप्रैल 2012 से लंबित है, जबकि तटीय क्षेत्र के कर्मचारियों का संशोधन अप्रैल 2018 से देय है, जबकि नियमानुसार हर दो वर्ष में वेतन संशोधन किया जाना अनिवार्य है। परिणामस्वरूप अंतर-द्वीप क्षेत्र के क्रू सदस्य 16 वर्ष पूर्व निर्धारित वेतन और तटीय क्षेत्र के सदस्य 10 वर्ष पूर्व निर्धारित वेतन पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों क्षेत्रों में वेतन संशोधन को अंतिम रूप दिया जा चुका है, किंतु इसे लागू नहीं किया जा सका क्योंकि प्रशासन ने प्रस्ताव को भारत सरकार के पोत, नौवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय को भेजा, जिसने इसे आगे गृह मंत्रालय को अग्रेषित किया, जो अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह का प्रशासनिक मंत्रालय है। यूनियन अध्यक्ष ने यह भी अवगत कराया कि प्रशासन द्वारा भेजा गया प्रस्ताव पिछले चार महीनों से भारत सरकार के विचाराधीन है। उन्होंने समय पर वेतन समझौता न होने से क्रू सदस्यों को हो रही आर्थिक कठिनाइयों का उल्लेख किया और कहा कि अन्य कर्मचारियों के विपरीत शिपिंग क्षेत्र के क्रू सदस्यों को वार्षिक वेतन वृद्धि या महंगाई भत्ता प्राप्त नहीं होता, जिससे वर्तमान अल्प आय में जीवन-यापन करना कठिन हो गया है। अय्यप्पन ने इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि ये कर्मचारी अभी भी 16 वर्ष पूर्व निर्धारित वेतन पर कार्य कर रहे हैं, वेतन संशोधन की शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया।