नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के बीच रविवार को निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने वाले लोगों को अवैध रूप से हिरासत में न लिया जाये। कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि कानून-व्यवस्था बनाये रखने की जरूरत को देखते हुए दिल्ली मेट्रो सामान्य रूप से संचालित हो और इंटरनेट सेवाओं में कोई बाधा न आये।
अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की अनुगवाई वाले पीठ ने विशेष सुनवाई के दौरान उस याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र को नोटिस भी जारी की, जिसमें CJP के विरोध प्रदर्शन के कारण दिल्ली में मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर ‘पूरी तरह रोक’ नहीं लगाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के ‘उल्लंघन’ को लेकर अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गयी थी। CJP और कुछ छात्र संगठनों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया था। सरकार ने शनिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था करके और 7,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर जंतर-मंतर पर प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन को रोक दिया। हिरासत में लिये गये लोगों में CJP नेता अभिजीत दिपके, विपक्ष के कई नेता और यूट्यूबर ध्रुव राठी भी शामिल थे।
वकीलों, पत्रकारों को न रोका जाये
पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से यह सुनिश्चित करने को कहा कि दिल्ली मेट्रो अपनी सामान्य समय-सारिणी के अनुसार चले और इंटरनेट सेवाएं बाधित न हों। पीठ ने यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य लोगों को अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करने से न रोका जाये। पीठ ने कहा कि कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अलावा किसी को भी अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। यह विशेष रूप से उन लोगों के एकत्र होने के मामले में लागू होगा, जो उस क्षेत्र के बाहर हैं, जहां निषेधाज्ञा लागू की गयी है।
इंटरनेट सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रहेंगी
पीठ ने कहा कि कानून के अनुसार इंटरनेट सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रहेंगी। जब हम कह रहे हैं कि इंटरनेट सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रहनी चाहिए, तो हमारा आशय सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत प्राप्त शक्तियों को समाप्त करना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने परिसर के बाहर लगाये गये उस सूचना बोर्ड को हटाने का आदेश दिया, जिस पर लिखा था कि पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाने वाली BNSS की धारा 163 लागू है।
कोर्ट के आदेश की अनसुनी हुई : सिब्बल
सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि पुलिस ट्रेनों से लोगों को हिरासत में ले रही थी। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर के चार किलोमीटर के दायरे से बाहर मौजूद लोगों को भी हिरासत में लिया जा रहा था, जबकि जंतर-मंतर पर निषेधाज्ञा लागू है। उन्होंने पीठ को बताया कि 9 अक्टूबर के उसके आदेश के बावजूद 45 मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास पर रोक लगा दी गयी थी।