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SIR पर उच्चतम न्यायालय के आदेश में बंगाल सरकार की शिकायतों की अनदेखी की गई : चिदंबरम

शीर्ष अदालत को निर्वाचन आयोग को “विशिष्ट निर्देश” देने की आवश्यकता

कोलकाता : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने कहा है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर हाल में आए उच्चतम न्यायालय के आदेश में पश्चिम बंगाल सरकार की शिकायतों का समाधान नहीं हुआ है। चिदंबरम ने कहा कि इन मुद्दों के निपटारे के लिए शीर्ष अदालत को निर्वाचन आयोग को “विशिष्ट निर्देश” देने की आवश्यकता है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में हुए एसआईआर की आलोचना करते हुए इसे “लोकतांत्रिक भागीदारी को कमजोर करने” और “राज्य के चुनावी संतुलन को बिगाड़ने का प्रयास” बताया। चिदंबरम ने कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि उच्चतम न्यायालय आगे भी निर्वाचन आयोग के लिए आवश्यक निर्देश जारी करेगा।उन्होंने कहा, “माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष चुनौती एसआईआर में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की थी। अदालत ने यह कहते हुए आदेश पारित किया कि वह एसआईआर प्रक्रिया में किसी ‘बाधा’ की अनुमति नहीं देगी। प्रक्रिया पूरी करने की समय-सीमा बढ़ा दी गई है।’’

इस आदेश से पश्चिम बंगाल सरकार की शिकायतों का समाधान नहीं हुआ

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इस आदेश से पश्चिम बंगाल सरकार की शिकायतों का समाधान नहीं हुआ। निर्वाचन आयोग को उन शिकायतों पर कार्रवाई के लिए विशेष आदेश या निर्देश देने की आवश्कता है। क्या आगे और आदेश जारी किए जाएंगे, यह मुझे नहीं पता, लेकिन मुझे उम्मीद है कि अदालत आयोग को और निर्देश देगी।” प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने सोमवार को पश्चिम बंगाल एसआईआर मामले में आपत्तियां दर्ज कराने की समय-सीमा 14 फरवरी से एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी। साथ ही राज्यों को कड़ा संदेश दिया कि इस प्रक्रिया में बाधा नहीं डाली जा सकती। मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी को निर्धारित है।

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