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आवाज को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

समय पर जांच से कैंसर तक की रोकथाम संभव

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : हर साल 16 अप्रैल को मनाया जाने वाला World Voice Day लोगों को आवाज के महत्व, उसकी देखभाल और उससे जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरूक करने का संदेश देता है। इस वर्ष की थीम “Caring for Our Voices” है, जो बताती है कि आवाज़ सिर्फ संचार का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान, आत्मविश्वास और पेशेवर जीवन का अहम हिस्सा है।

Dr Shantanu Panja, जो Apollo Multispeciality Hospitals में ईएनटी-हेड एंड नेक सर्जरी विभाग के चीफ सर्जन और सीनियर कंसल्टेंट हैं, ने बताया कि आज के दौर में आवाज़ से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। खासतौर पर शिक्षक, वकील, राजनेता, गायक, अभिनेता और कॉर्पोरेट पेशेवर जैसे लोग, जो अपनी आवाज़ पर निर्भर हैं, उनमें यह समस्याएं ज्यादा देखी जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि लगातार बैठी हुई आवाज़ (होर्सनेस) सबसे आम चेतावनी संकेत है और इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर आवाज़ में बदलाव 3-4 हफ्ते से ज्यादा बना रहे, तो तुरंत जांच करानी चाहिए। देर से इलाज कराने पर बीमारी गंभीर हो सकती है और इलाज भी जटिल हो जाता है।

डॉ. पांजा के अनुसार, आवाज़ से जुड़ी समस्याएं सामान्य इंफेक्शन या लैरिंजाइटिस से लेकर वोकल कॉर्ड पैरालिसिस और वोकल कॉर्ड कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों तक हो सकती हैं। खासकर धूम्रपान करने वालों में कैंसर का खतरा अधिक होता है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि शुरुआती अवस्था में पहचाने गए वोकल कॉर्ड कैंसर का इलाज आधुनिक तकनीकों जैसे CO₂ लेज़र सर्जरी और थायरोप्लास्टी से सफलतापूर्वक किया जा सकता है, जिसमें अक्सर आवाज़ को भी बचाया जा सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि सही वोकल हाइजीन और जीवनशैली में बदलाव से इन समस्याओं को रोका जा सकता है। पर्याप्त पानी पीना, भाप लेना, एसिड रिफ्लक्स से बचाव, धूम्रपान से दूरी और आवाज़ का सीमित उपयोग बेहद जरूरी है।

डॉ. पांजा ने चेतावनी दी कि अनदेखी की गई आवाज़ की समस्याएं मानसिक और सामाजिक जीवन पर भी असर डाल सकती हैं, जिससे आत्मविश्वास, करियर और रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

अंत में उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी आवाज़ में होने वाले किसी भी बदलाव को गंभीरता से लें और समय पर विशेषज्ञ से सलाह लें। उनका स्पष्ट संदेश है—“आवाज़ में बदलाव को कभी नजरअंदाज न करें, समय पर जांच ही बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य की कुंजी है।”

अपोलो हॉस्पिटल्स के बारे में:
Apollo Hospitals Enterprise Limited की स्थापना Dr Prathap C Reddy ने 1983 में चेन्नई में की थी। आज यह विश्व का एक बड़ा हेल्थकेयर नेटवर्क है, जिसके तहत 73 अस्पताल, 10,000 से अधिक बेड, 5,500 फार्मेसी और 200 से अधिक क्लीनिक व डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित हो रहे हैं।

अपोलो आधुनिक चिकित्सा तकनीकों और रिसर्च के जरिए मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है।

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