मुख्य बातें
ड्राइवरों को भोजन-पानी की किल्लत,
औद्योगिक इकाइयों में कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने का खतरा,
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : असम और पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित श्रीरामपुर बॉर्डर पर रॉ पेट्रोलियम कोक (RPC) से लदे सैकड़ों ट्रकों के फंसे रहने से कारोबार पर भारी असर पड़ रहा है। करीब 40 दिनों से ट्रकों की आवाजाही बाधित होने के कारण करोड़ों रुपये के माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। वहीं, लंबे समय से फंसे ट्रकों के ड्राइवराें को भोजन, पीने के पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। आंध्र प्रदेश लॉरी ओनर्स एसोसिएशन (APLOA) ने इस मामले को उठाते हुए कहा है कि वैधानिक दस्तावेज और कर भुगतान से संबंधित औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद मालवाहक वाहनों को रोके जाने से अंतरराज्यीय व्यापार प्रभावित हो रहा है।
करीब 300 ट्रक पश्चिम बंगाल में फंसे
एसोसिएशन के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) असम स्थित रिफाइनरियों से रवाना हुए करीब 300 ट्रक पश्चिम बंगाल में फंसे हुए हैं। इनमें लगभग आधे ट्रक विशाखापत्तनम जाने वाले थे, जबकि शेष ट्रकों में लदा माल पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में पहुंचाया जाना था। ट्रकों के लंबे समय तक रुके रहने से औद्योगिक इकाइयों तक कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने और उत्पादन में देरी की आशंका है।
बंगाल में भी व्यापक असर
इस बारे में बात करते हुए ग्रेफाइट इंडिया लिमिटेड के प्लांट के जीएम आलोक चांडक ने बताया कि हमारे दुर्गापुर प्लांट में कच्चे सामान की आपूर्ति नहीं होने से उत्पादन में असर आ रहा है। सामान की कोई जिम्मेदारी लेने वाला नहीं है। आरपीसी की सप्लाई बंद होने से बुरा हाल है। करीब 1000 से अधिक वर्कर बेकार हो गये हैं। विदेश में एक्सपोर्ट का काम भी बंद पड़ा है। वहीं एक अन्य ग्रुप से राजेश वडेरा ने बताया कि इसे क्यों रोका गया है, यह किसी को पता नहीं। सभी सही दस्तावेज होने के बाद भी बंगाल में एंट्री नहीं मिलने से काफी नुकसान हो रहा है।
जीएसटी भुगतान और ई-वे बिल होने का दावा
एसोसिएशन ने दावा किया है कि रोके गए ट्रकों में ऐसे वाहन भी शामिल हैं, जिनके माल पर नियमानुसार जीएसटी का भुगतान किया गया है और जिनके पास वैध ई-वे बिल मौजूद हैं। उदाहरण देते हुए एसोसिएशन ने बताया कि एक ट्रक में 35.07 मीट्रिक टन रॉ पेट्रोलियम कोक लदा है, जिसे विशाखापत्तनम स्थित रेन सीआईआई कार्बन लिमिटेड पहुंचाया जाना था। 19 सितंबर 2026 के इनवॉयस के अनुसार, 17.28 लाख रुपये के कर योग्य मूल्य पर 3.11 लाख रुपये आईजीएसटी का भुगतान किया गया है।
डेमरेज का नुकसान करीब एक करोड़ रुपये
ट्रकों के लंबे समय तक खड़े रहने से वाहन मालिकों पर डिटेंशन चार्ज और ब्याज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। एसोसिएशन के मुताबिक, अब तक डेमरेज के रूप में करीब एक करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। इसके अलावा, माल की समय पर आपूर्ति नहीं होने से संबंधित कंपनियों और औद्योगिक इकाइयों के कामकाज पर भी असर पड़ने की आशंका है।
केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग
इस मामले में APLOA ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) को ज्ञापन सौंपा है। एसोसिएशन ने आंध्र प्रदेश जाने वाले 16 ट्रकों के दस्तावेजों का तत्काल सत्यापन करने और बिना लिखित वैधानिक आधार के रोके गए वाहनों को मुक्त करने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि मामले का जल्द समाधान जरूरी है, ताकि ट्रकों की आवाजाही बहाल हो सके और चालकों के साथ-साथ कारोबारियों को हो रही परेशानी कम हो।