कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर जारी संघर्ष के बीच ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी गुट शुक्रवार को चुनाव आयोग (ईसी) के समक्ष अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज पेश करेगा। आयोग ने अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और संगठनात्मक चुनाव से जुड़े दावों के समर्थन में बागी गुट को 10 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का समय दिया था।
इस बीच, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल खेमे ने चुनाव आयोग पर बागी गुट को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि आयोग ने पहले दोनों पक्षों से 6 जुलाई तक जवाब मांगा था। तृणमूल ने निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना जवाब दाखिल कर दिया, जबकि बागी गुट को अतिरिक्त समय दिया गया।
पार्टी का आरोप है कि इससे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। तृणमूल का दावा है कि पार्टी के संगठनात्मक चुनाव वर्ष 2022 में हुए थे और पार्टी संविधान के अनुसार मौजूदा संगठनात्मक समितियों का कार्यकाल 2027 तक वैध है। इसलिए बागी गुट का यह दावा कि वर्ष 2025 में समितियों का कार्यकाल समाप्त हो गया, तथ्यात्मक और कानूनी रूप से गलत है।
दूसरी ओर, ऋतब्रत गुट का कहना है कि उसने विशेष संगठनात्मक अधिवेशन के माध्यम से नए नेतृत्व का गठन किया है और वही "वास्तविक तृणमूल कांग्रेस" का प्रतिनिधित्व करता है। अब चुनाव आयोग के समक्ष दोनों पक्षों के दावों और दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।