कोलकाता : ‘अनिलायन’ से ‘ममतायन’ और अब ‘भाजपायन’? शिक्षण संस्थानों में राजनीतिक दखल को लेकर ‘असल तृणमूल’ के नेता ऋतव्रत बनर्जी ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोला। शुक्रवार को तृणमूल छात्र परिषद (टीएमसीपी) के स्थापना दिवस पर धर्मतला में आयोजित कार्यक्रम से उन्होंने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में तत्काल छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग उठायी।
ऋतव्रत ने कहा, ‘‘छात्रसंघ चुनाव नहीं होने से छात्र आंदोलन बाधित हो रहा है। सरकार को स्पष्ट करना होगा कि वह चुनाव कराना चाहती है या नहीं।’’ साथ ही, उन्होंने पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार को भी कठघरे में खड़ा किया। उनका आरोप था कि छात्रसंघ चुनाव बंद करना तृणमूल की बड़ी भूल थी और उसी गलती की जमीन पर भाजपा सत्ता में आयी।
भाजपा सरकार के कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी में सांसदों और विधायकों को अध्यक्ष बनाने के फैसले पर भी उन्होंने सवाल उठाया। ऋतव्रत ने कहा, ‘‘अनिलायन और ममतायन से आप भी नहीं निकल पाये। आप भी उसी दोष के भागीदार हैं।’’ उन्होंने सवाल किया कि शिक्षण संस्थानों में राजनीतिक प्रतिनिधियों को जिम्मेदारी देने की जरूरत आखिर क्यों पड़ रही है।
उन्होंने छात्र नेताओं के लिए निश्चित आयु सीमा तय करने की जरूरत भी बतायी। ऋतव्रत के मुताबिक, इस मुद्दे पर नेतृत्व के साथ चर्चा चल रही है। साथ ही उन्होंने छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने का आह्वान किया।
लंबे समय से बंद छात्रसंघ चुनाव अब बंगाल की छात्र राजनीति में एक बार फिर बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा है। ‘असल तृणमूल’ ने इसे भाजपा सरकार के खिलाफ अपने राजनीतिक अभियान का प्रमुख हथियार बनाने के संकेत दिये हैं।